रायपुर। गरीब और जरूरतमंद मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित आयुष्मान भारत स्वास्थ्य योजना को लेकर रायपुर जिले में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं। स्वास्थ्य विभाग के पास पिछले 14 महीनों के दौरान निजी अस्पतालों से जुड़ी 29 शिकायतें दर्ज हुई हैं। शिकायतों में मरीजों से योजना के तहत निशुल्क इलाज के बावजूद अतिरिक्त रकम मांगने, गलत पैकेज के तहत उपचार करने और पात्र मरीजों को इलाज का लाभ नहीं देने जैसे आरोप सामने आए। विभाग की जांच के बाद कुछ मामलों में मरीजों से ली गई अतिरिक्त राशि वापस कराई गई, जबकि कई शिकायतों का समाधान योजना के तहत उपचार उपलब्ध कराकर किया गया।
शिकायत मिलने पर अस्पतालों से मांगा गया जवाब
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, आयुष्मान योजना से संबंधित शिकायतों की जांच के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत संबंधित अस्पतालों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया। शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों और अस्पताल के रिकॉर्ड का मिलान किया गया। जांच के बाद करीब आधा दर्जन मामलों में मरीजों से ली गई अतिरिक्त राशि वापस कराई गई। वहीं, कुछ मरीजों को योजना के प्रावधानों के अनुसार उपचार का लाभ भी दिलाया गया।
प्रदेश के करीब 100 अस्पतालों की जांच
आयुष्मान योजना में अनियमितताओं को लेकर राज्य स्तर पर भी कार्रवाई जारी है। राज्य स्तरीय टीम करीब 100 अस्पतालों की जांच कर चुकी है। इनमें से 17 अस्पताल संदेह के दायरे में बताए जा रहे हैं। इन अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए संबंधित साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। रायपुर जिले में योजना की निगरानी के लिए गठित कमेटी को निजी अस्पतालों के संबंध में नियमित रूप से शिकायतें मिलती हैं। छोटी शिकायतों का समाधान कई बार फोन के माध्यम से किया जाता है, जबकि लिखित शिकायत मिलने पर मामले की जांच कर कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है।
29 शिकायतों में सामने आए अलग-अलग मामले
विभागीय आंकड़ों के अनुसार गलत उपचार और आयुष्मान योजना के क्रियान्वयन से संबंधित 29 शिकायतें सामने आईं। जांच में कुछ शिकायतें सही पाई गईं, जबकि करीब पांच मामलों में आरोप निराधार मिले। कुछ मामलों में जांच के दौरान अस्पताल और मरीज के बीच आपसी सहमति से विवाद का समाधान हुआ। वहीं कुछ मामलों में अस्पताल द्वारा मरीज से वसूली गई राशि वापस की गई।
कुछ उपचार योजना के पैकेज में शामिल नहीं
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि एक-दो मामलों में जिस उपचार की मांग मरीज द्वारा की गई थी, वह आयुष्मान योजना के निर्धारित पैकेज में शामिल नहीं था। ऐसे मामलों में अस्पताल द्वारा मरीज को उपचार देने से इनकार किया गया था। इस तरह की परिस्थितियों में मरीजों को योजना के प्रावधानों की सही जानकारी देना भी जरूरी माना जा रहा है, ताकि अनावश्यक विवाद की स्थिति पैदा न हो।
17 अस्पतालों पर कार्रवाई का इंतजार
राज्य की नोडल एजेंसी के पास रायपुर सहित प्रदेश के 17 अस्पतालों में योजना के कथित दुरुपयोग से जुड़ी शिकायतों का परीक्षण चल रहा है। जांच पूरी होने के बाद संबंधित अस्पतालों पर कार्रवाई की जा सकती है। संभावना है कि नियमों का उल्लंघन साबित होने पर संबंधित अस्पतालों को आयुष्मान योजना के पैनल से बाहर करने के साथ आर्थिक दंड भी लगाया जा सकता है। इससे पहले करीब दो वर्ष पूर्व स्टेट नोडल एजेंसी ने 48 अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की थी।
योजना की निगरानी और शिकायतों का निराकरण जारी
नर्सिंग होम एक्ट के जिला नोडल अधिकारी डॉ. अविनाश चतुर्वेदी के अनुसार, आयुष्मान योजना का वास्तविक लाभ पात्र मरीजों तक पहुंचाना विभाग की प्राथमिकता है। निजी अस्पतालों की निगरानी की जा रही है और योजना से संबंधित शिकायतों को गंभीरता से लेकर उनका निराकरण किया जा रहा है। वहीं, आयुष्मान भारत स्वास्थ्य सहायता योजना की निगरानी करने वाली स्टेट नोडल एजेंसी में स्वास्थ्य संचालनालय के उपसंचालक देवेंद्र प्रधान को प्रोजेक्ट डायरेक्टर की जिम्मेदारी दी गई है। इससे पहले वे बलरामपुर-रामानुजगंज में संयुक्त कलेक्टर के पद पर कार्यरत थे। स्वास्थ्य संचालनालय में उनकी नई जिम्मेदारी में एबीडीएम, सीआईडीएमएस और स्थापना शाखा से जुड़े कार्य शामिल हैं।
मरीजों के लिए जरूरी संदेश
आयुष्मान योजना के तहत इलाज कराने वाले मरीजों को अस्पताल द्वारा अतिरिक्त राशि मांगे जाने या योजना के लाभ से वंचित किए जाने की स्थिति में संबंधित विभाग के समक्ष शिकायत दर्ज करानी चाहिए। शिकायत के साथ उपचार से जुड़े दस्तावेज, बिल और अन्य प्रमाण उपलब्ध कराने पर मामले की जांच में आसानी होती है। रायपुर में सामने आई 29 शिकायतें यह बताती हैं कि आयुष्मान योजना के क्रियान्वयन में निगरानी व्यवस्था की अहम भूमिका है। विभाग द्वारा शिकायतों की जांच और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई से पात्र मरीजों को योजना का वास्तविक लाभ दिलाने में मदद मिल सकती है।