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खामेनेई का अंतिम संस्कार 3 महीने बाद, जानिए कब और कहां होंगे सुपुर्द-ए-खाक

खामेनेई का अंतिम संस्कार 3 महीने बाद, जानिए कब और कहां होंगे सुपुर्द-ए-खाक

ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की बहुप्रतीक्षित अंतिम यात्रा आखिरकार शुरू होने जा रही है। अमेरिका-इजराइल हमले में उनकी मौत के करीब तीन महीने बाद ईरानी प्रशासन ने सार्वजनिक श्रद्धांजलि और अंतिम संस्कार का विस्तृत कार्यक्रम जारी किया है। सुरक्षा कारणों और क्षेत्रीय तनाव की वजह से यह आयोजन लगातार टलता रहा था। अब तेहरान से लेकर मशहद तक होने वाले इस कार्यक्रम को लेकर पूरे ईरान में तैयारियां तेज हैं और लाखों लोगों के जुटने की संभावना के चलते सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

तीन महीने बाद क्यों हो रहा है अंतिम संस्कार?

खामेनेई की मृत्यु के बाद ईरान लगातार अस्थिर सुरक्षा परिस्थितियों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का सामना कर रहा था। इसी कारण सरकार ने सार्वजनिक अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार को स्थगित कर दिया था। अधिकारियों का मानना है कि अब हालात पहले की तुलना में अधिक नियंत्रित हैं, इसलिए अंतिम यात्रा और दफन की प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से आयोजित किया जा रहा है।

तेहरान से मशहद तक ऐसा रहेगा अंतिम यात्रा का कार्यक्रम

आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार अंतिम यात्रा कई महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों से होकर गुजरेगी। सबसे पहले शनिवार और रविवार को खामेनेई के पार्थिव शरीर को तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा, जहां आम नागरिकों के साथ-साथ सैन्य अधिकारी और शीर्ष राजनीतिक नेता श्रद्धांजलि देंगे।

इसके बाद सोमवार और मंगलवार को पार्थिव शरीर को शिया समुदाय के प्रमुख धार्मिक केंद्र कोम ले जाया जाएगा। यहां प्रमुख धर्मगुरु और धार्मिक संस्थाएं विशेष प्रार्थना सभाओं का आयोजन करेंगी।

बुधवार को अंतिम यात्रा इराक के पवित्र शहर कर्बला पहुंचेगी। शिया समुदाय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण इस शहर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान और श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

मशहद में होगा अंतिम संस्कार

कर्बला से लौटने के बाद खामेनेई के पार्थिव शरीर को मशहद लाया जाएगा, जहां विश्व प्रसिद्ध इमाम रजा दरगाह परिसर में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। यह दरगाह शिया समुदाय के सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों में गिनी जाती है और हर साल दुनिया भर से लाखों श्रद्धालु यहां जियारत के लिए पहुंचते हैं।

इमाम रजा दरगाह का धार्मिक महत्व

मशहद स्थित इमाम रजा दरगाह शिया इस्लाम के आठवें इमाम, इमाम अली अल-रजा से जुड़ी हुई है। यह केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि ईरान की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का भी प्रमुख प्रतीक माना जाता है। इसी वजह से खामेनेई के अंतिम संस्कार के लिए इस स्थान का चयन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सुरक्षा एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती

अंतिम यात्रा के दौरान भारी भीड़ को नियंत्रित करना ईरानी प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है। वर्ष 1989 में अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी के अंतिम संस्कार के दौरान लाखों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी थी, जिससे हालात बेकाबू हो गए थे और अफरा-तफरी की स्थिति बन गई थी। इस बार ऐसी किसी भी स्थिति से बचने के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं।

अंतिम यात्रा के राजनीतिक संकेत

विशेषज्ञों का मानना है कि यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं बल्कि ईरान की सत्ता व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश भी है। क्षेत्रीय संघर्ष, आर्थिक चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच यह कार्यक्रम सरकार के जनसमर्थन और राजनीतिक प्रभाव को प्रदर्शित करने का अवसर माना जा रहा है।

पूरी दुनिया की नजरें इस आयोजन पर

अयातुल्ला अली खामेनेई कई दशकों तक ईरान की राजनीति, विदेश नीति और पश्चिम एशिया की रणनीति के सबसे प्रभावशाली चेहरों में शामिल रहे। ऐसे में उनकी अंतिम यात्रा केवल ईरान तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे मध्य पूर्व और वैश्विक कूटनीतिक जगत की नजरें इस आयोजन पर टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह कार्यक्रम धार्मिक, राजनीतिक और सुरक्षा दृष्टि से दुनिया की सबसे चर्चित घटनाओं में शामिल रहेगा।


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