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SAGAR NEWS : न मां रही, न पिता का साया... 20 साल की बेटी ने कांपते हाथों से दी पिता को मुखाग्नि

SAGAR NEWS : न मां रही, न पिता का साया... 20 साल की बेटी ने कांपते हाथों से दी पिता को मुखाग्नि

सागर: मध्य प्रदेश के सागर से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। महज 20 साल की एक बेटी ने पहले मां को खोया और अब पिता का साया भी उसके सिर से उठ गया। पिता मजदूरी कर बेटी का पालन-पोषण कर रहे थे और उसे पढ़ाकर बेहतर भविष्य देना चाहते थे। लेकिन देर रात हार्ट अटैक ने उनकी जिंदगी छीन ली।

बेटी ने पिता की अर्थी को कंधा दिया 

परिवार में कोई बेटा नहीं होने के कारण बेटी ने हिम्मत दिखाते हुए पिता की अर्थी को कंधा दिया और मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार किया। मुक्तिधाम में मौजूद लोगों की आंखें इस मार्मिक दृश्य को देखकर नम हो गईं।

51 वर्षीय लखनलाल अहिरवार मजदूरी करते थे

दरअसल, सागर के तुलसीनगर वार्ड में रहने वाले 51 वर्षीय लखनलाल अहिरवार मजदूरी का काम करते थे। परिवार में उनकी पत्नी मीना अहिरवार और एक बेटी कविता थी। लेकिन जब कविता महज दो साल की थी, तभी मां मीना का निधन हो गया। इसके बाद लखनलाल ने अकेले ही बेटी की परवरिश की। मजदूरी करके जो कुछ कमाते, उसी से बेटी की जरूरतें पूरी करते और उसे बेहतर जिंदगी देने की कोशिश करते रहे।

देर रात आया हार्ट अटैक 

आज कविता 20 साल की है और नर्सिंग का कोर्स कर रही है। पिता ही उसके लिए मां भी थे और पिता भी। लेकिन देर रात अचानक हार्ट अटैक आने से लखनलाल की तबीयत बिगड़ गई। बेटी कविता उन्हें लेकर अस्पताल पहुंची, लेकिन पिता को बचाया नहीं जा सका।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़ 

इसके बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। पिता की अंतिम विदाई का समय आया तो बेटे की जगह बेटी ने ही सारी जिम्मेदारी संभाली। कविता ने पिता की अर्थी को अपने कंधे पर उठाया और रिश्तेदारो औऱ परिचितों के नरयावली नाका मुक्तिधाम पहुंची। जहां बेटी कविता ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। इस भावुक पल को देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखों से आंसू छलक पड़े।

रिश्तेदारों ने जिला प्रशासन से लगाई मदद की गुहार 

परिवार और रिश्तेदारों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों से लेकर जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि बेटी की पढ़ाई की व्यवस्था की कराई जाए एवं उसको नर्सिंग की नोकरी दी जाए

 सहारे को खो देने का दर्दनाक पल

बहरहाल जिस पिता ने मजदूरी करके बेटी का भविष्य बनाया, आज उसी बेटी ने कांपते हाथों से पिता को अंतिम विदाई दी। मां के बाद पिता को भी खो चुकी कविता के लिए यह सिर्फ एक अंतिम संस्कार नहीं, बल्कि जिंदगीभर के सहारे को खो देने का दर्दनाक पल था।


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