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300 महिला नगर सैनिकों ने खोला मोर्चा: पूर्व कमांडेंट पर अभद्र व्यवहार और मानसिक प्रताड़ना के आरोप

300 महिला नगर सैनिकों ने खोला मोर्चा: पूर्व कमांडेंट पर अभद्र व्यवहार और मानसिक प्रताड़ना के आरोप

छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में महिला नगर सैनिकों से जुड़े एक गंभीर मामले ने तूल पकड़ लिया है। करीब 300 महिला नगर सैनिकों ने संयुक्त रूप से शिकायत दर्ज कर तत्कालीन नगर सेना कमांडेंट पर अभद्र व्यवहार, अपमानजनक भाषा का प्रयोग और मानसिक उत्पीड़न करने के आरोप लगाए हैं। यह शिकायत छत्तीसगढ़ महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक की मौजूदगी में आयोजित जनसुनवाई के दौरान सौंपी गई।

हस्ताक्षरयुक्त आवेदन में लगाए गंभीर आरोप

महिला नगर सैनिकों ने आयोग को दिए गए सामूहिक आवेदन में आरोप लगाया कि तत्कालीन कमांडेंट ड्यूटी के दौरान अक्सर महिलाओं के साथ अनुचित व्यवहार करते थे। शिकायत के अनुसार कई मौकों पर सार्वजनिक रूप से अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया, जिससे महिला कर्मचारियों को मानसिक तनाव और असहज स्थिति का सामना करना पड़ा।

महिला आयोग ने जांच के दिए निर्देश

मामले की गंभीरता को देखते हुए छत्तीसगढ़ महिला आयोग ने नगर सेना विभाग को आंतरिक परिवाद समिति के माध्यम से विस्तृत जांच कराने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने संबंधित अधिकारियों को शिकायतकर्ता महिलाओं और आरोपित अधिकारी के बयान दर्ज कर दो माह के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।

जनसुनवाई में कई अन्य मामलों पर भी हुई सुनवाई

कोरबा में आयोजित जनसुनवाई के दौरान घरेलू विवाद, भरण-पोषण, कार्यस्थल पर उत्पीड़न, संपत्ति विवाद और पुलिस कार्रवाई से जुड़े कई मामलों की भी सुनवाई की गई। आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश जारी किए। कुछ मामलों में पक्षकारों को न्यायालय जाने की सलाह दी गई, जबकि अन्य मामलों में महिला थाना और सखी सेंटर को कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

भरण-पोषण और संपत्ति विवाद में भी दिए निर्देश

एक प्रकरण में पति द्वारा पत्नी और बच्चे के भरण-पोषण की जिम्मेदारी नहीं निभाने पर आयोग ने हर महीने 5 हजार रुपये देने के निर्देश दिए। वहीं मकान स्वामित्व से जुड़े एक विवाद में संबंधित पक्ष को निर्धारित समय सीमा के भीतर मकान खाली करने की समझाइश भी दी गई।

महिलाओं को समय पर न्याय दिलाना प्राथमिकता

महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने कहा कि महिलाओं से जुड़े मामलों में त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करना आयोग की प्राथमिकता है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी मामलों की जांच तय समयसीमा में पूरी कर पीड़ित महिलाओं को शीघ्र न्याय दिलाने की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए।


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