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छत्तीसगढ़ में वर्किंग वुमन की 5 साल में 21% इजाफा, ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं बनीं बदलाव की नई पहचान...

छत्तीसगढ़ में वर्किंग वुमन की 5 साल में 21% इजाफा, ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं बनीं बदलाव की नई पहचान...

रायपुर: छत्तीसगढ़ में महिलाओं की भूमिका तेजी से की बदल रही है। अब महिलाएं सिर्फ घर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे रोजगार और आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं। राज्य में वर्किंग वुमन का कल्चर तेजी से बढ़ रहा है, जो सामाजिक और आर्थिक बदलाव का संकेत है। पिछले 15 वर्षों के आंकड़ों (2011 से 1 मार्च 2026) के अनुसार, राज्य में कामकाजी महिलाओं की संख्या 50 लाख 46 हजार 359 से बढ़कर 61 लाख 28 हजार 748 हो गई है। यानी करीब 10.82 लाख नई महिलाएं कार्यबल में शामिल हुई हैं।

ग्रामीण और छोटे जिलों में ज्यादा बदलाव

इस बदलाव की सबसे खास बात यह है कि बड़े शहरों की तुलना में छोटे जिलों और ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ी है। यह संकेत देता है कि अब गांवों में भी महिलाएं आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

बड़े शहरों में स्थिति

राजधानी रायपुर में कामकाजी महिलाओं की संख्या में 26.46% की वृद्धि दर्ज की गई है, जहां यह आंकड़ा 2.64 लाख से बढ़कर 3.34 लाख हो गया है। हालांकि बिलासपुर, दुर्ग, राजनांदगांव और अंबिकापुर जैसे बड़े जिलों में वृद्धि हुई है, लेकिन यह छोटे जिलों की तुलना में कम है।

टॉप 5 जिले: जहां महिलाओं ने मारी बाजी

इन जिलों में कामकाजी महिलाओं की संख्या में बलौदाबाजार: 2.12 लाख से 3.11 लाख (46.13%), सक्ती: 1.56 लाख से 2.27 लाख (45.66%), बेमेतरा: 1.82 लाख से 2.59 लाख (42.17%), जांजगीर-चांपा: 2.12 लाख से 2.96 लाख (39.61%) और मुंगेली: 1.52 लाख से 2.09 लाख (36.83%) सबसे ज्यादा प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है, यह आंकड़े दिखाते हैं कि विकासशील जिलों में महिलाओं की भागीदारी सबसे तेजी से बढ़ रही है।

जहां वृद्धि रही सबसे कम

कुछ जिलों में महिलाओं की रोजगार भागीदारी लगभग स्थिर रही है, उत्तर बस्तर कांकेर: -0.05% (हल्की गिरावट) बस्तर: 0.08%, रायगढ़: 2.53%, सुकमा: 2.94%, नारायणपुर: 5.21% इन क्षेत्रों में रोजगार के सीमित अवसर और भौगोलिक चुनौतियां प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।

महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम

छत्तीसगढ़ में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी न सिर्फ आर्थिक विकास को गति दे रही है, बल्कि यह समाज में लैंगिक समानता और आत्मनिर्भरता की दिशा में भी बड़ा कदम है।विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर और बढ़ाए जाएं, तो आने वाले वर्षों में यह वृद्धि और तेज हो सकती है। छत्तीसगढ़ में वर्किंग वुमन की बढ़ती संख्या एक सकारात्मक संकेत है। यह बदलाव राज्य के सामाजिक और आर्थिक ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। खासतौर पर ग्रामीण महिलाओं का आगे आना इस बदलाव की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा है।


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