
MP Bjp Politics: इन पदाधिकारियों का नहीं रहेगा पहले जैसा रुतबा....!
दिनेश निगम ‘त्यागी’: राज्य सरकार ऐसा चौंकाने वाला निर्णय लेने जा रही है, जिसके कारण् प्रदेश के निगम-मंडल, आयोग, प्राधिकरणों आदि में नई राजनीतिक नियुक्त पाने वाले नेताओं का पहले जैसा रुतबा नहीं रहेगा। इसके तहत सरकार नवनियुक्त पदाधिकारियों को मंत्री और राज्य मंत्री का दर्जा नहीं देगी। ऐसा हुआ तो किसी भी पदाधिकारी को वीआईपी प्रोटोकॉल नहीं मिल सकेगा। वे जिस पद पर नियुक्त हुए, सिर्फ उसके प्रभाव का ही उपयोग कर सकेंगे। इस खबर से पद पाने वाले नेताओं में निराशा है।
अलबत्ता, इन्हें अपने दायित्व के साथ ऐसे विधानसभा क्षेत्रों की जवाबदारी देने का निर्णय लिया जा रहा है, जहां भाजपा पिछला चुनाव हार गई थी। पार्टी ने जो फार्मूला तैयार किया है, इसके तहत नेताओं को उनके गृह जिले या गृह विधानसभा क्षेत्र में कोई जिम्मेदारी नहीं सौंपी जाएगी। उन्हें पूरी तरह से नए और अलग क्षेत्रों में जाकर काम करना होगा। ऐसा कर गृह क्षेत्रों में स्थानीय नेताओं के बीच वर्चस्व की लड़ाई और गुटबाजी से बचा जा सकेगा। संगठन ने साफ कर दिया है कि पद अब केवल प्रतिष्ठा या आराम के लिए नहीं, बल्कि मैदान में उतरकर पार्टी के लिए पसीना बहाने और परिणाम देने के लिए दिए जा रहे हैं। हालांकि इस निर्णय से संबंधित नेता की चुनाव के टिकट के लिए दावेदारी मजबूत हो सकती है।
न पहले हुआ, न अब होगा इस चेतावनी का असर....!
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय सिंह पार्टी छोड़ने वाले नेताओं को लेकर हमेशा सख्त रहे हैं। इन्हें वे गद्दार कहते हैं और हमेशा इनकी कांग्रेस में वापसी का विरोध करते रहे हैं। चौधरी राकेश सिंह की वापसी उनके अड़े रहने के कारण ही लंबे समय तक टलती रही। पर कोई फायदा नहीं हुआ। चौधरी कांग्रेस में आए और टिकट हासिल कर चुनाव भी लड़े। अजय इनसे इसलिए भी ज्यादा नाराज थे क्योंकि चौधरी ने उस समय कांग्रेस छोड़ी थी जब अजय सिंह नेता प्रतिपक्ष थे और भाजपा सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आए थे।
अविश्वास पर चर्चा शुरू करने के लिए चौधरी का नाम पुकारा गया और वे सदन के अंदर ही पाला बदल कर भाजपा के खेमे में चले गए। अब अजय ने कांग्रेस की सरकार गिराने वाले केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यदि वे कांग्रेस में आना चाहेंगे तो नहीं लेंगे। अजय ने अल्टीमेटम देते हुए यह भी कहा कि मेरे विरोध के बावजूद यदि सिंिधया को कांग्रेस में लिया गया तो वे खुद पार्टी छोड़ देंगे। सवाल है कि क्या अजय अब भी कांग्रेस को अच्छी तरह नहीं जानते? क्या उन्हें ऐसा अल्टीमेटम देना चाहिए? यह सवाल इसलिए वाजिब है कि चौधरी की तरह सिंधिया जब चाहेंगे, कांग्रेस में आ जाएंगे और अजय कुछ नहीं कर पाएंगे।
नहीं माने दिग्विजय, भोजशाला पर उठा दिया सवाल....
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने जब इंदौर की विधायक ऊषा ठाकुर के साथ संवाद में कहा कि उन्होंने भोजशाला पर आए निर्णय का विरोध नहीं किया है। वे फैसले का अध्ययन कर रहे हैं, इसके बाद अपनी प्रतिक्रिया देंगे। माना जा रहा था कि कांग्रेस ने इस मसले पर चुप रह कर हिंदुओं की भावनाओं का सम्मान किया है और हिंदू-मुस्लिम मसले पर हमेशा बोलने वाले दिग्विजय ने भी कोई बयान न देकर पार्टी को मुसीबत में नहीं डाला। पर यह सोच गलत थी, क्योंकि दिग्विजय नहीं माने और दो दिन बाद ही बयान जारी कर हाईकोर्ट के निर्णय पर सवाल उठा दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की रिपोर्ट में भोजशाला परिसर में मंदिर होने के कोई प्रमाण नहीं मिले थे।
उन्होंने कहा कि उमा भारती सरकार के दौरान सरकारी वकील द्वारा पेश की गई एएसआई रिपोर्ट में भोजशाला में मंदिर होने के प्रमाण नहीं बताए गए थे। दिग्विजय ने कहा कि एएसआई संरक्षित स्मारकों को पूजा स्थल के रूप में इस्तेमाल करने को लेकर कानूनी स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। विश्व हिंदू परिषद के नेता विनोद बंसल ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लगातार हिंदू विरोधी बयान देती रही है। उसका चेहरा लोगों के सामने है।
फिर सीडियों में ही दफन हो जाएंगे हनी ट्रैप के राज....!
इंदौर से उजागर हुए पहले हनी ट्रैप काे लोग भूलने लगे थे कि हनी ट्रैप का दूसरा पार्ट सामने आ गया। इसकी मास्टर माइंड भी पहले पार्ट की श्वेता जैन हैं। इस बार अन्य के साथ नया नाम जुड़ा है सागर की ही रेशु उर्फ अभिलाषा चौधरी का। रेशु के पास सौ से ज्यादा अश्लील वीडियो बताए जा रहे हैं, जिनके जरिए रसूखदानों को ब्लैकमेल कर बड़ी रकम वसूल की जा रही थी। हनी ट्रैप के पहले पार्ट में कई आला अफसरों, मंत्रियों, नेताओं, पत्रकारों के नाम उछले थे लेकिन उन्हें रिकार्ड में नहीं आने दिया गया। इस बार भी पूछताछ के दौरान चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं, जिससे रसूखदारों की धड़कनें बढ़ रहीं हैं।
इस बार भी जांच के चलते कुछ मौजूदा विधायकों, मालवा-निमाड़ के कुछ रसूखदार नेताओं, मप्र के साथ छत्तीसगढ़ तक के कुछ अफसरों का नाम उछल रहा है। पूछताछ के लिए एक पत्रकार भी पकड़े गए हैं। इतना ही नहीं जांच की आंच दिल्ली के नेताओं तक पहुंच रही है। हनी ट्रैप गैंग द्वारा राजधानी के एक नेता से करीब 4 करोड़ रुपए की वसूली की भी खबरें हैं। बहरहाल, राजनीतिक-प्रशासनिक, सामाजिक जगत में जबरदस्त हड़कम्प की स्थिति है। पर सवाल यह है कि जांच नतीजे तक पहुंचेगी या पहले पार्ट की तरह इस बार भी रसूखदारों के नाम सीडियों में ही दफन होकर रह जाएंगे?
ठीक नहीं चल रहे विधायक मालवीय के ग्रह नक्षत्र....!
प्रदेश के भाजपा विधायक डॉ चिंतामणि मालवीय के ग्रह नक्षत्र पिछले काफी समय से ठीक नहीं चल रहे हैं। उनसे जुड़ा एक विवाद शांत नहीं होता और अगला चिंता में डाल देता है। विवाद उनका पीछा नहीं छोड़ते या वे खुद इन्हें जन्म देते हैं, यह शोध का विषय है। पहले विधानसभा के अंदर उन्होंने सिंहस्थ के लिए किसानों की जमीन लेने की योजना का विराेध किया था। इस पर भाजपा नेतृत्व ने उन्हें नोटिस जारी किया था। उनके रुख को मुख्यमंत्री डॉ यादव और सरकार के निर्णय का विराेध माना गया। इसके बाद उनके ऊपर उज्जैन विवि की एक महिला प्रोफेसर को प्रताड़ित किए जाने के आरोप लगे।
कहा गया कि इनकी प्रताड़ना से तंग आकर महिला ने नौकरी से इस्तीफा तक दे दिया था। बाद में शिकायत करने वालीं महिला कांग्रेस अध्यक्ष रीना बौरासी के खिलाफ उन्होंने मानहानि का दावा कर दिया। अब चिंतामणि महाकाल पािर्कंग की जमीन को लेकर विवाद में फंस गए। आरोप है कि महाकाल पािर्कंग के लिए आरक्षित 45 हजार वर्ग फीट सरकारी जमीन चिंतामणि की कंपनी ने औने-पौने दाम 3.82 करोड़ रुपए में खरीद ली। इसे लेकर उनका विरोध हो रहा है। हालांकि चिंतामणि का कहना है कि खरीदी प्रक्रिया नियमानुसार हुई है। सच जो भी हो, पर चिंताए चिंतामणि का पीछा नहीं छोड़ रही हैं।
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