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रुद्राक्ष को क्यों कहा जाता है महादेव के आंसू, जानें कैसी हुई इसकी उत्पत्ति

रुद्राक्ष को क्यों कहा जाता है महादेव के आंसू, जानें कैसी हुई इसकी उत्पत्ति

अक्सर अपने लोगों को रुद्राक्ष धारण करते हुए देखा होगा। खास तौर पर साधु, संत और अघोरी इसे शौक से पहनते है। लेकिन कुछ लोग रुद्राक्ष को मन की शांति, सोचने की छमता बढ़ने और जीवन में सकारात्मकता लाने के लिए इसे धारण करते है। लेकिन क्या आप जानते है कि रुद्राक्ष की उत्पति कैसे हुई ? और क्यों इसे महादेव के आंसू कहा जाता है। तो चलिए जानते है इसके पीछे की कहानी और सच्चाई  ... .

महादेव के आंसू से हुआ रुद्राक्ष का जन्म

कथाओं के अनुसार, जब महादेव ध्यान में लीन थे। तो उन्हें लोगों की पीड़ा और परेशानी के बारे में पता चला। जिसे सुन उनके आंखो से आंसू छलक गए और धरती में जा गिरे। जिसके बाद जिस जिस स्थान पर महादेव के आंसू गिरे उन जगहों पर रुद्राक्ष के वृक्ष का जन्म हुआ। इसी वजह से रुद्राक्ष को “रुद्र” यानी शिव और “अक्ष” यानी आंसू-कहा जाता है। इतना ही नहीं कई जगहों पर रुद्राक्ष को भगवान शिव की तीसरी आंख के भी स्वरूप में पूजा जाता है। इस प्रकार रुद्राक्ष की उत्पत्ति हुई।

रुद्राक्ष क्या होता है?

रुद्राक्ष असल में एक पेड़ का बीज है. जिसका फल सूखने पर अंदर से कठोर बीज निकलता है, जिसकी सतह पर प्राकृतिक धारियां या खांचे होते हैं।  इन्हीं खांचों को “मुख” कहा जाता है. यह पेड़  ज़्यादातर नेपाल, भारत और इंडोनेशिया के कुछ हिस्सों में पाया जाता है.

इस पेड़ का नाम Elaeocarpus ganitrus है, लेकिन आम लोग इसे रुद्राक्ष के पेड़ के नाम से जानते हैं. दिलचस्प बात ये है कि ये कोई इंसान द्वारा तराशा हुआ मनका नहीं, बल्कि प्रकृति की बनाई बनावट है. यही वजह है कि लोग इसे खास और पवित्र मानते हैं। 

रुद्राक्ष के प्रकार

एक मुखी रुद्राक्ष
यह काफी दुर्लभ और प्रभावशाली है। इसको धारण करने से व्यक्ति की आध्यात्मिक उन्नति होती है और उसकी एकाग्रता बढ़ती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जहां पर एक मुखी रुद्राक्ष होता है। वहां अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों का वास होता है। 

दो मुखी रुद्राक्ष
इसे शिव शक्ति का स्वरूप माना गया है। इसको धारण करने से व्यक्ति मानसिक रूप से मजबूत होता है। 

तीन मुखी रुद्राक्ष
इसको धारण करने से अग्निदेव प्रसन्न हो जाते हैं। इसके अलावा इसको पहनने से व्यक्ति की ओज और ऊर्जा में वृद्धि होती है। 

चार मुखी रुद्राक्ष
चार मुखी रुद्राक्ष को ब्रह्मा का स्वरूप माना गया है। मान्यताओं के अनुसार अगर आप इस रुद्राक्ष का धारण करते हैं। ऐसे में आपको मोक्ष की प्राप्ति होती है। 

पंचमुखी रुद्राक्ष
इसे शिव का स्वरूप माना गया है। यह शुभ का प्रतीक है। इसको धारण करने से व्यक्ति के आध्यात्मिक ज्ञान में वृद्धि होती है। 

छह मुखी रुद्राक्ष
इसको कार्तिकेय का स्वरूप माना गया है। छह मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से व्यक्ति को भय और डर से मुक्ति मिलती है। 

सात मुखी रुद्राक्ष
इसको शुक्र ग्रह का स्वरूप माना गया है। इसको धारण करने से व्यक्ति के ऊपर मां लक्ष्मी की विशेष कृपा बरसती है। 

अष्टमुखी रुद्राक्ष
यह रुद्राक्ष अष्ट मातृकाओं का प्रतीक है। इसको धारण करने से व्यक्ति के ऊपर किसी प्रकार का अशुभ प्रभाव नहीं पड़ता। 

नौमुखी रुद्राक्ष
इसे नवशक्ति का प्रतीक माना गया है। अगर आप इसको पहनते हैं। ऐसे में मां दुर्गा की विशेष कृपा बरसती है। 

बारह मुखी और चौदह मुखी रुद्राक्ष
इन दोनों को भगवान शिव का प्रतीक माना गया है। मान्यताओं के अनुसार जहां पर ये दोनों रुद्राक्ष होते हैं। वहां पर सुख-शांति का वास होता है। इसको धारण करने से व्यक्ति को आमोद की प्राप्ति होती है। 


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