वॉशिंगटन। अमेरिका में उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद नौकरी करने का सपना देख रहे हजारों भारतीय छात्रों के लिए एक नया प्रस्ताव चिंता का कारण बन सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप प्रशासन Optional Practical Training (OPT) कार्यक्रम के तहत मिलने वाले वर्क ऑथराइजेशन पर 1 लाख डॉलर (लगभग 85 लाख रुपये) तक का शुल्क लगाने की संभावना पर विचार कर रहा है। हालांकि, इस प्रस्ताव पर अभी अंतिम फैसला नहीं लिया गया है, लेकिन यदि इसे मंजूरी मिलती है तो इसका सबसे अधिक असर भारतीय छात्रों पर पड़ सकता है।
क्या है OPT प्रोग्राम?
OPT (Optional Practical Training) अमेरिका के F-1 स्टूडेंट वीजा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके माध्यम से अंतरराष्ट्रीय छात्र अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने विषय से जुड़े क्षेत्र में काम करने की अनुमति प्राप्त करते हैं। सामान्य छात्रों को अधिकतम 12 महीने तक काम करने की अनुमति मिलती है। STEM (Science, Technology, Engineering and Mathematics) विषयों के छात्रों को अतिरिक्त अवधि मिलाकर 36 महीने तक काम करने का अवसर मिलता है। अधिकांश भारतीय छात्र इसी कार्यक्रम के जरिए अमेरिकी कंपनियों में अनुभव हासिल करते हैं और बाद में H-1B वर्क वीजा के लिए आवेदन करते हैं।
भारतीय छात्रों पर क्या होगा असर?
यदि OPT वर्क ऑथराइजेशन के लिए 1 लाख डॉलर शुल्क लागू होता है, तो इसके कई बड़े प्रभाव सामने आ सकते हैं। अमेरिका में पढ़ाई के बाद नौकरी करना बेहद महंगा हो जाएगा। आर्थिक रूप से मध्यम वर्गीय छात्रों के लिए अमेरिका में करियर बनाना कठिन हो सकता है। कई छात्र अमेरिका के बजाय कनाडा, ऑस्ट्रेलिया या यूरोपीय देशों का विकल्प चुन सकते हैं। H-1B वीजा तक पहुंचने का रास्ता भी प्रभावित हो सकता है क्योंकि अधिकांश छात्र पहले OPT के जरिए कार्य अनुभव प्राप्त करते हैं।
पहले H-1B वीजा पर भी आया था ऐसा प्रस्ताव
यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप प्रशासन ने वर्क वीजा से जुड़ा बड़ा शुल्क प्रस्तावित किया हो। इससे पहले H-1B वीजा पर भी इसी तरह का भारी शुल्क लगाने की कोशिश की गई थी। हालांकि, उस प्रस्ताव को अदालत ने रोक दिया था। अब प्रशासन OPT कार्यक्रम के तहत नए विकल्पों पर विचार कर रहा है।
DHS ने क्या कहा?
अमेरिकी Department of Homeland Security (DHS) के अनुसार, फिलहाल यह केवल एक प्रस्ताव है और इस पर चर्चा जारी है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। आधिकारिक घोषणा होने तक इसे लागू नीति नहीं माना जाना चाहिए।
ग्रीन कार्ड आवेदकों के लिए भी नया विचार
रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रशासन अमेरिका के बाहर से ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने वाले कुछ आवेदकों के लिए 1 लाख डॉलर का रिफंडेबल बॉन्ड लागू करने पर भी विचार कर रहा है। प्रस्ताव के मुताबिक, यदि आवेदक अमेरिका में स्थायी रूप से बस जाता है और बाद में अमेरिकी नागरिक बन जाता है, तो यह राशि वापस की जा सकती है।
क्या अभी छात्रों को चिंता करनी चाहिए?
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल यह केवल विचाराधीन प्रस्ताव है। जब तक अमेरिकी सरकार इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं करती, तब तक छात्रों को घबराने की जरूरत नहीं है। हालांकि, अमेरिका में उच्च शिक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों और अभिभावकों को आगे आने वाले सरकारी फैसलों पर नजर बनाए रखनी चाहिए।