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छत्तीसगढ़ में अफसरों की भारी कमी: 29 IAS और 19 IPS पद खाली, कई अधिकारी केंद्र में तैनात

छत्तीसगढ़ में अफसरों की भारी कमी: 29 IAS और 19 IPS पद खाली, कई अधिकारी केंद्र में तैनात

रायपुर। छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक व्यवस्था इन दिनों अधिकारियों की कमी से जूझ रही है। राज्य में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 29 और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के 19 पद रिक्त हैं, जिससे शासन-प्रशासन पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है। मिली जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ कैडर के कई वरिष्ठ अधिकारी वर्तमान में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत हैं। इससे मंत्रालय से लेकर जिला स्तर तक कामकाज प्रभावित हो रहा है और कई अधिकारियों को एक साथ कई विभागों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है।

स्थिति पर एक नजर

राज्य में IAS के कुल 202 स्वीकृत पद हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 173 अधिकारी ही कार्यरत हैं। इनमें 128 अधिकारी सीधे भर्ती से और 47 पदोन्नति के जरिए नियुक्त हुए हैं। वहीं, IPS के 153 पदों के मुकाबले सिर्फ 134 अधिकारी ही तैनात हैं।

 केंद्रीय प्रतिनियुक्ति का असर

इस समय 21 IAS अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत हैं। ये अधिकारी केंद्र सरकार में नीति निर्माण, आंतरिक सुरक्षा और निवेश जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सेवाएं दे रहे हैं। इनमें कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं, जिनकी अनुपस्थिति का असर राज्य के प्रशासनिक कामकाज पर साफ दिखाई दे रहा है। हाल ही में 2016 बैच के एक IAS अधिकारी को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में उप सचिव के रूप में नियुक्त किया गया है। आमतौर पर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति की अवधि 5 वर्ष होती है, जिसे विशेष परिस्थितियों में 7 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है।

एक अधिकारी, कई जिम्मेदारियां

अधिकारियों की कमी के चलते कई वरिष्ठ अधिकारियों को एक साथ कई विभागों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है। इससे फैसले लेने और योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी की आशंका बढ़ गई है।

चुनाव ड्यूटी से बढ़ेगी चुनौती

आने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर छत्तीसगढ़ से 30 अधिकारियों को अन्य राज्यों में पर्यवेक्षक बनाकर भेजा जा रहा है। इनमें 25 IAS और 5 वरिष्ठ IPS अधिकारी शामिल हैं, जो लगभग एक महीने तक चुनावी जिम्मेदारी निभाएंगे। इससे राज्य में अधिकारियों की कमी और अधिक गहराने की संभावना है। छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक ढांचे पर अधिकारियों की कमी का असर साफ दिख रहा है। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति और चुनावी ड्यूटी के कारण यह स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है, जिससे शासन की कार्यक्षमता प्रभावित होने की आशंका है।


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