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प्रदेशभर पटवारियों की हड़ताल से राजस्व सेवाएं प्रभावित, सरकार पर बढ़ा समाधान का दबाव

प्रदेशभर पटवारियों की हड़ताल से राजस्व सेवाएं प्रभावित, सरकार पर बढ़ा समाधान का दबाव

भोपाल। MP Patwari Strike: मध्य प्रदेश में वर्षों से लंबित मांगों को लेकर पटवारियों ने एक बार फिर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मध्यप्रदेश पटवारी संघ के आह्वान पर प्रदेशभर में बस्ताबंद हड़ताल शुरू हो गई है। संघ का कहना है कि जब तक सरकार उनकी प्रमुख मांगों पर स्पष्ट और लिखित निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इस हड़ताल में प्रदेश के हजारों पटवारी शामिल हैं, जिससे राजस्व विभाग के कई काम प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

राजस्व मंत्री से हुई चर्चा, लेकिन हड़ताल जारी

हड़ताल के पहले दिन पटवारी संघ के प्रतिनिधियों ने प्रदेश के राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा से मुलाकात की। बैठक में मंत्री ने कर्मचारियों की मांगों को मुख्यमंत्री के समक्ष रखने और समाधान निकालने का भरोसा दिया। हालांकि, संघ ने साफ किया कि केवल मौखिक आश्वासन पर्याप्त नहीं है और ठोस प्रशासनिक आदेश जारी होने तक आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा।

कैडर रिव्यू और प्रमोशन सबसे बड़ी मांग

पटवारी संघ का कहना है कि उनकी सबसे अहम मांग कैडर रिव्यू लागू करना है। इसके अलावा समयमान वेतनमान में मौजूद विसंगतियों को समाप्त करने और नियमित पदोन्नति व्यवस्था लागू करने की भी मांग की जा रही है। संघ का दावा है कि ये मुद्दे करीब 25 वर्षों से लंबित हैं, जिससे हजारों कर्मचारियों का करियर प्रभावित हुआ है।

इन मांगों पर भी सरकार से कार्रवाई की अपेक्षा

संघ ने सरकार के सामने कई अन्य महत्वपूर्ण मांगें भी रखी हैं। इनमें जजेस प्रोटेक्शन एक्ट के तहत सुरक्षा, संघ पदाधिकारियों के स्थानांतरण निरस्त करना, विभिन्न सरकारी योजनाओं में किए गए कार्य का लंबित मानदेय जारी करना तथा नायब तहसीलदार भर्ती के लिए विभागीय परीक्षा शीघ्र आयोजित करना शामिल है।

सरकार की ओर से मिले सकारात्मक संकेत

राजस्व विभाग की ओर से कुछ मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया गया है। विभाग के प्रमुख सचिव ने निर्देश दिए हैं कि किसी भी पटवारी के खिलाफ बिना प्रारंभिक जांच के एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी। इसके साथ ही विभिन्न सरकारी योजनाओं में कार्यरत पटवारियों का लंबित मानदेय जल्द जारी करने की प्रक्रिया भी तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।

संघ ने उठाए खाली पदों का मुद्दा

पटवारी संघ के प्रदेशाध्यक्ष उपेंद्र सिंह बघेल का कहना है कि सरकार का रुख सकारात्मक जरूर दिखाई दे रहा है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे—कैडर रिव्यू, समयमान वेतनमान और पदोन्नति अब भी अधूरे हैं। उनके अनुसार प्रदेश में राजस्व निरीक्षक (आरआई) के 1100 से अधिक पद खाली हैं, इसके बावजूद वर्षों से पटवारियों को नियमित प्रमोशन नहीं मिला है।

आम जनता और किसानों पर पड़ सकता है असर

यदि हड़ताल लंबी चली तो नामांतरण, सीमांकन, फसल संबंधी रिकॉर्ड, राजस्व प्रमाण पत्र और अन्य राजस्व सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। इसका सीधा असर किसानों और आम नागरिकों को मिलने वाली सरकारी सेवाओं पर पड़ने की संभावना है। फिलहाल सभी की निगाहें सरकार और पटवारी संघ के बीच होने वाली अगली वार्ता पर टिकी हैं।


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