रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले की पुसौर नगर पंचायत में स्थानीय राजनीति को लेकर हलचल तेज हो गई है। यहां भाजपा से जुड़े 8 पार्षदों ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने की जानकारी दी है। सभी पार्षदों ने अपना इस्तीफा रायगढ़ जिला भाजपा अध्यक्ष अरुणधर दीवान को भेजा है।
एक साथ कई पार्षदों के इस्तीफे से नगर पंचायत की स्थानीय राजनीति में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। अब संगठन स्तर पर इस घटनाक्रम को लेकर क्या कदम उठाया जाता है और नाराज पार्षदों से बातचीत होती है या नहीं, इस पर नजर बनी हुई है।
अध्यक्ष की कार्यप्रणाली से नाराजगी की बात
इस्तीफा देने वाले पार्षदों की नाराजगी का एक प्रमुख कारण नगर पंचायत अध्यक्ष मानी मोहित सतपथी की कार्यप्रणाली को बताया जा रहा है। पार्षदों की ओर से नगर पंचायत क्षेत्र में अपेक्षित विकास कार्य नहीं होने को लेकर भी असंतोष जताए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, पार्षदों के इस्तीफे और उनके द्वारा बताए गए कारणों को लेकर भाजपा संगठन की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।
जिला भाजपा अध्यक्ष को सौंपा इस्तीफा
जानकारी के मुताबिक, सभी आठ पार्षदों ने अपने इस्तीफे भाजपा के रायगढ़ जिला अध्यक्ष अरुणधर दीवान को भेजे हैं। सामूहिक रूप से इस्तीफा दिए जाने के बाद अब संगठन के सामने इस पूरे मामले को सुलझाने की चुनौती है।पार्षदों की नाराजगी के कारणों और आगे की रणनीति को लेकर भाजपा संगठन की ओर से क्या निर्णय लिया जाता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
पुसौर नगर पंचायत में 15 वार्ड
पुसौर नगर पंचायत में अध्यक्ष के अलावा कुल 15 वार्डों से पार्षद निर्वाचित होते हैं। वर्ष 2025 के आधिकारिक निर्वाचन रिकॉर्ड में मानी मोहित सतपथी को नगर पंचायत अध्यक्ष के रूप में दर्ज किया गया है। ऐसे में भाजपा से जुड़े आठ पार्षदों का एक साथ पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देना स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम है। हालांकि, इन इस्तीफों का नगर पंचायत के कामकाज और राजनीतिक समीकरणों पर क्या असर पड़ेगा, यह आगे की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
विकास कार्यों को लेकर उठे सवाल
पार्षदों की नाराजगी के केंद्र में नगर पंचायत क्षेत्र में विकास कार्यों की स्थिति होने की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि कुछ पार्षद अध्यक्ष की कार्यशैली और क्षेत्र में अपेक्षित विकास कार्यों को लेकर असंतुष्ट थे। फिलहाल यह देखना अहम होगा कि भाजपा संगठन इस मामले में पार्षदों से बातचीत करता है या इस्तीफे स्वीकार करने को लेकर कोई निर्णय लेता है।