रायपुर: प्रधानमंत्री आवास प्लस 2.0 योजना के लिए तैयार की गई लाभार्थियों की सूची विवादों में आ गई है। रायपुर जिले के कई गांवों से शिकायतें मिली हैं कि सूची में ऐसे लोगों के नाम शामिल कर दिए गए हैं, जिनके पास पहले से पक्का मकान और पर्याप्त कृषि भूमि है। वहीं, कई जरूरतमंद और पात्र परिवारों के नाम सूची से बाहर रह गए हैं। इन शिकायतों के बाद योजना की पारदर्शिता और सर्वे प्रक्रिया पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
दावा-आपत्तियों में सामने आईं कई शिकायतें
योजना की प्रारंभिक सूची जारी होने के बाद जनपद पंचायतों में दावा और आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया पूरी की गई। इस दौरान चारों विकासखंडों से बड़ी संख्या में शिकायतें मिलीं। अधिकांश शिकायतों में आरोप लगाया गया कि पात्र हितग्राहियों के नाम सूची में नहीं जोड़े गए, जबकि अपात्र लोगों को लाभार्थी बना दिया गया।
आलीशान मकान वालों के नाम भी सूची में शामिल होने का आरोप
आरंग क्षेत्र के भानसोज और रसनी सहित कई गांवों में ऐसे मामलों की शिकायत सामने आई है, जहां पहले से पक्का मकान और पर्याप्त जमीन रखने वाले परिवारों के नाम भी लाभार्थियों की सूची में दर्ज हो गए। कुछ मामलों में शिकायत के बाद नाम हटाने की कार्रवाई भी की गई, लेकिन इससे सूची तैयार करने की प्रक्रिया पर सवाल और गहरे हो गए हैं।
ग्राम सभा और जियो टैगिंग के बाद भी कैसे हुई गड़बड़ी?
आवास प्लस 2.0 योजना के लिए गांव-गांव में आवास मित्रों के माध्यम से जियो टैगिंग कर सर्वे कराया गया था। इसके बाद विशेष ग्राम सभाओं में सूची का भौतिक सत्यापन भी किया गया और ग्रामीणों से आपत्तियां आमंत्रित की गईं। इसके बावजूद अपात्र लोगों के नाम सूची में शामिल होने से यह सवाल उठ रहा है कि सर्वे और सत्यापन प्रक्रिया में आखिर चूक कहां हुई।
जिला पंचायत की बैठक में गूंज सकता है मामला
10 जुलाई को प्रस्तावित जिला पंचायत की सामान्य सभा में इस मुद्दे के उठने की संभावना जताई जा रही है। कई जनप्रतिनिधियों ने पहले ही सूची में हुई कथित अनियमितताओं पर नाराजगी व्यक्त की है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
प्रशासन ने जांच का दिया भरोसा
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने कहा है कि दावा-आपत्तियों के आधार पर प्राप्त सभी शिकायतों की जांच की जा रही है। यदि किसी अपात्र व्यक्ति का नाम सूची में पाया जाता है तो उसे हटाया जाएगा और केवल वास्तविक पात्र परिवारों को ही योजना का लाभ दिया जाएगा।
जनप्रतिनिधियों ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग
जिला पंचायत के जनप्रतिनिधियों का कहना है कि कई वास्तविक जरूरतमंद परिवार योजना से वंचित रह गए हैं, जबकि कुछ अपात्र लोगों के नाम सूची में शामिल हो गए। उनका मानना है कि पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कर पात्र हितग्राहियों को न्याय दिलाया जाना चाहिए।