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पेट्रोल 341 के पार, डीजल 368 रुपये के पार; महंगाई के बीच फिर लगा आम आदमी को बड़ा झटका

पेट्रोल 341 के पार, डीजल 368 रुपये के पार; महंगाई के बीच फिर लगा आम आदमी को बड़ा झटका

महंगाई से जूझ रही जनता को ईंधन की कीमतों में एक और बढ़ोतरी का सामना करना पड़ा है। पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल (HSD) के दाम में फिर इजाफा किया गया है। पेट्रोल की कीमत 3.81 रुपये प्रति लीटर बढ़ी है, जबकि डीजल के दाम में 3.59 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। नई कीमतें 22 अगस्त 2026 से लागू की गई हैं और फिलहाल 24 अगस्त तक प्रभावी रहेंगी।

पेट्रोल-डीजल के नए रेट

कीमतों में ताजा बढ़ोतरी के बाद पेट्रोल का रेट बढ़कर 341.59 रुपये प्रति लीटर हो गया है। इसी तरह हाई-स्पीड डीजल अब 368.29 रुपये प्रति लीटर में बिक रहा है। यानी पेट्रोल 340 रुपये के स्तर को पार कर चुका है और डीजल भी 370 रुपये के आंकड़े के बेहद करीब पहुंच गया है। लगातार महंगे होते ईंधन से वाहन चालकों के साथ-साथ ट्रांसपोर्ट और कारोबार से जुड़े लोगों की लागत भी बढ़ रही है।

कुछ ही दिनों में फिर बढ़े दाम

ईंधन की कीमतों में यह लगातार हो रही बढ़ोतरी का सिलसिला है। इससे पहले 21 अगस्त को भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव किया गया था। उस समय पेट्रोल 27 पैसे और हाई-स्पीड डीजल 1.64 रुपये प्रति लीटर महंगा हुआ था। अब एक बार फिर दोनों ईंधनों के दाम बढ़ाए जाने से लोगों के सामने बढ़ते खर्च की नई चुनौती खड़ी हो गई है।

पेट्रोल-डीजल पर सरकार वसूल रही टैक्स

ईंधन की खुदरा कीमत में टैक्स और लेवी का भी बड़ा हिस्सा शामिल है। पेट्रोलियम डिवीजन की जानकारी के मुताबिक, पेट्रोल पर करीब 114 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर लगभग 100 रुपये प्रति लीटर टैक्स एवं लेवी वसूली जा रही है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव के साथ घरेलू टैक्स और शुल्क भी ईंधन की अंतिम कीमत को प्रभावित करते हैं।

महंगा ईंधन बढ़ाएगा बाकी चीजों का खर्च?

पेट्रोल और डीजल की कीमत बढ़ने का असर सिर्फ पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहता। डीजल महंगा होने से ट्रकों और दूसरे मालवाहक वाहनों की परिचालन लागत बढ़ती है। इसका असर माल ढुलाई पर पड़ सकता है। परिवहन खर्च बढ़ने पर बाजार में रोजमर्रा की जरूरतों की वस्तुओं की कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है। वहीं, सार्वजनिक परिवहन का किराया बढ़ने की स्थिति में आम लोगों का मासिक बजट और प्रभावित हो सकता है।

अब 15 दिन नहीं, रोज बदल सकते हैं ईंधन के दाम

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईंधन की कीमत तय करने की व्यवस्था में बदलाव किया गया है। पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने बताया है कि पहले जहां ईंधन की कीमतों की समीक्षा 15 दिनों के अंतराल पर होती थी, अब कीमतों को दैनिक आधार पर तय करने की व्यवस्था लागू की गई है। इस बदलाव के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी या गिरावट का असर घरेलू पेट्रोल-डीजल के रेट पर ज्यादा तेजी से दिखाई दे सकता है।


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