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देश में कचरा प्रबंधन के नए नियम लागू, अब बड़े संस्थानों को खुद करनी होगी जिम्मेदारी

देश में कचरा प्रबंधन के नए नियम लागू, अब बड़े संस्थानों को खुद करनी होगी जिम्मेदारी

देशभर में कचरा प्रबंधन को व्यवस्थित और प्रभावी बनाने के लिए नए नियम लागू कर दिए गए हैं, जिन्होंने पुराने प्रावधानों की जगह ले ली है। इन नियमों के तहत अब बड़े संस्थानों और संगठनों पर कचरे के निस्तारण की जिम्मेदारी पहले से ज्यादा सख्ती के साथ तय कर दी गई है। इसका उद्देश्य कचरे के बेहतर प्रबंधन के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है।

“बल्क वेस्ट जनरेटर” की नई परिभाषा

नए प्रावधानों में “बल्क वेस्ट जनरेटर” की परिभाषा को संशोधित किया गया है। अब ऐसे संस्थान, जो तय मानकों को पूरा करते हैं, उन्हें इस श्रेणी में शामिल किया जाएगा और उन्हें अपने परिसर में उत्पन्न कचरे का प्रबंधन खुद करना होगा।

इन मानकों के अनुसार:

जिन संस्थानों का क्षेत्रफल 20,000 वर्गमीटर या उससे अधिक है
जहां प्रतिदिन 40,000 लीटर या उससे अधिक पानी की खपत होती है
या जहां रोजाना 100 किलो या उससे अधिक कचरा उत्पन्न होता है

उन्हें इस श्रेणी में रखा जाएगा।

किन संस्थानों पर लागू होंगे नियम?

इस दायरे में सरकारी विभाग, स्थानीय निकाय, सार्वजनिक उपक्रम, निजी कंपनियां, स्कूल-कॉलेज, बड़ी हाउसिंग सोसायटी, होटल, बाजार और बड़े आयोजनों के आयोजक शामिल हैं। इन सभी के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि वे अपने परिसर में कचरे का पृथक्करण और निस्तारण खुद सुनिश्चित करें।

सर्टिफिकेट की व्यवस्था भी लागू

यदि कोई संस्थान अपने स्तर पर कचरे का प्रबंधन नहीं कर सकता, तो उसे “Extended Bulk Waste Generator Responsibility (EBWGR)” सर्टिफिकेट लेना होगा। यह प्रमाणपत्र इस बात का संकेत होगा कि संबंधित संस्थान कचरे के निस्तारण के लिए अधिकृत एजेंसी की सेवाएं ले रहा है या तय मानकों का पालन कर रहा है।

यह सर्टिफिकेट स्थानीय निकायों द्वारा जारी किया जाएगा, जैसे Municipal Corporation of Delhi।

नियमों का बढ़ा दायरा और सख्ती

नए नियमों के तहत कचरा प्रबंधन का दायरा पहले से अधिक व्यापक कर दिया गया है। इसके साथ ही इनके पालन को लेकर भी सख्ती बढ़ाई गई है, ताकि कोई भी संस्थान जिम्मेदारी से बच न सके।

राजधानी में Municipal Corporation of Delhi (MCD) ने इन नियमों को लागू करना शुरू कर दिया है और कई बड़े संस्थानों को दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

बड़े संस्थानों को दिए गए निर्देश

इन निर्देशों के तहत कई प्रमुख संस्थानों को अपने परिसर में कचरे का सही प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है। इनमें शामिल हैं:

DSIIDC
डायरेक्ट्रेट ऑफ एग्रीकल्चर मार्केटिंग
उच्च शिक्षा विभाग (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र)
Delhi Metro Rail Corporation
Indian Railways

इन सभी संस्थानों को गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग करने और वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।

क्यों जरूरी हैं ये बदलाव?

तेजी से बढ़ते शहरीकरण और जनसंख्या के कारण कचरे की मात्रा लगातार बढ़ रही है। ऐसे में बड़े संस्थानों को जिम्मेदार बनाना जरूरी हो गया है, क्योंकि वे बड़ी मात्रा में कचरा उत्पन्न करते हैं। इन नए नियमों का उद्देश्य यही है कि कचरे को स्रोत पर ही नियंत्रित किया जाए और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को कम किया जाए।


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