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अवैध प्लाटिंग का आरोप, बिना डायवर्सन कृषि भूमि के 40 से अधिक प्लॉट बेचने का दावा

अवैध प्लाटिंग का आरोप, बिना डायवर्सन कृषि भूमि के 40 से अधिक प्लॉट बेचने का दावा

छत्तीसगढ़ के मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में कृषि भूमि की कथित अवैध प्लाटिंग को लेकर विवाद गहरा गया है। जिला मुख्यालय मोहला से लगे ग्राम चिलमटोला में ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि बिना भूमि उपयोग परिवर्तन (डायवर्सन) कराए कृषि भूमि को छोटे-छोटे भूखंडों में विभाजित कर आवासीय प्लॉट के रूप में बेचा जा रहा है। ग्रामीणों का दावा है कि इस पूरे मामले में राजस्व विभाग और उप पंजीयक कार्यालय की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए।

सात एकड़ से अधिक कृषि भूमि पर अवैध प्लाटिंग का आरोप

ग्रामीणों के मुताबिक जिला बनने के बाद मोहला क्षेत्र भू-माफियाओं की गतिविधियों का नया केंद्र बन गया है। आरोप है कि चिलमटोला में करीब सात एकड़ से अधिक कृषि भूमि को बिना डायवर्सन कराए छोटे-छोटे प्लॉट में विभाजित किया गया और उन्हें ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है। उनका कहना है कि इससे सरकारी नियमों की अनदेखी होने के साथ-साथ शासन को राजस्व का भी नुकसान पहुंच रहा है।

40 से ज्यादा भूखंडों की रजिस्ट्री होने का दावा

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि लगातार लगे पांच कृषि खसरों को 40 से अधिक प्लॉटों में विभाजित कर उनकी रजिस्ट्री और नामांतरण तक की प्रक्रिया पूरी की गई। उनका कहना है कि एक ही खसरा नंबर के अलग-अलग हिस्सों की बिक्री की जा रही है, जिससे कॉलोनाइजर एक्ट और रेरा से जुड़े नियमों के पालन पर भी सवाल उठ रहे हैं।

भू-माफियाओं और संबंधित लोगों पर लगाए गए आरोप

ग्रामीणों ने दावा किया है कि संबंधित भूमि अफरोज खान, सजीदा बेगम, शहनाज बेगम, सायरा बेगम, हेमंत साहू सहित अन्य लोगों के नाम दर्ज है। आरोप है कि जमीन खरीदने के बाद कुछ लोगों ने बिना वैधानिक अनुमति प्लॉट विकसित कर बिक्री शुरू कर दी। शिकायत में रेमंत देवांगन और हेमंत साहू की भूमिका का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

राजस्व विभाग की भूमिका पर भी उठे सवाल

ग्रामीणों का आरोप है कि अवैध प्लाटिंग के बावजूद रजिस्ट्री, नामांतरण और नक्शा विभाजन जैसी प्रक्रियाएं आसानी से पूरी हो रही हैं। उनका कहना है कि मूल खसरों से उपखंड तैयार किए जा रहे हैं, जिससे पूरे मामले में राजस्व अमले की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

मूलभूत सुविधाओं के बिना बेचे जा रहे प्लॉट

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्लॉट खरीदने वालों को विकसित कॉलोनी का भरोसा दिया जा रहा है, जबकि मौके पर केवल कच्ची सड़क बनाई गई है। बिजली, पेयजल, नाली, पार्क और अन्य बुनियादी सुविधाओं का अभाव बताया जा रहा है।

रेरा और कॉलोनाइजर नियमों के पालन पर सवाल

सूत्रों के अनुसार, जिले में कॉलोनाइजर एक्ट के तहत किसी वैध कॉलोनाइजर का पंजीकरण नहीं है और न ही संबंधित परियोजनाओं का रेरा में पंजीयन हुआ है। ऐसे में बिना वैधानिक अनुमति बड़े पैमाने पर प्लॉटिंग और रजिस्ट्री होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

तहसीलदार ने जांच का दिया आश्वासन

मोहला तहसीलदार नेहा विश्वकर्मा ने कहा कि अवैध प्लाटिंग की शिकायतें प्राप्त हुई हैं। उन्होंने बताया कि संदिग्ध प्लॉटों की रजिस्ट्री और नामांतरण रोकने के लिए आवश्यक पत्र जारी किए जाएंगे। साथ ही संबंधित पटवारियों से जानकारी लेकर पूरे मामले की जांच की जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।


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