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झीरम घाटी हमले का इंतजार खत्म: NIA स्पेशल कोर्ट आज तय करेगी आरोपियों का भविष्य

झीरम घाटी हमले का इंतजार खत्म: NIA स्पेशल कोर्ट आज तय करेगी आरोपियों का भविष्य

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के सबसे चर्चित और दर्दनाक नक्सली हमलों में शामिल झीरम घाटी कांड में आज, 31 अगस्त को बड़ा न्यायिक फैसला आने वाला है। करीब 13 वर्षों से चल रही लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद NIA की विशेष अदालत इस मामले में अपना फैसला सुना सकती है। फैसले पर न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश की नजर बनी हुई है। इस मामले में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। हालांकि, मुकदमे के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई थी। शेष आरोपियों के खिलाफ अदालत में सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया था।

101 गवाहों के बयान और सबूतों पर टिका मामला

झीरम घाटी नक्सली हमले से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष कई महत्वपूर्ण साक्ष्य पेश किए। न्यायिक प्रक्रिया के दौरान कुल 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए, जिन्हें मामले के फैसले के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गवाहों के बयान, दस्तावेजी प्रमाण और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोनों पक्षों ने अपनी दलीलें अदालत के सामने रखीं। अंतिम बहस पूरी होने के बाद NIA की विशेष अदालत ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अदालत उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कितने आरोपियों को दोषी ठहराती है और किन आरोपियों को राहत मिलती है।

25 मई 2013 को हुआ था झीरम घाटी हमला

झीरम घाटी में 25 मई 2013 को हुआ नक्सली हमला देश की सबसे बड़ी और चर्चित राजनीतिक हिंसा की घटनाओं में शामिल रहा है। इस हमले ने पूरे छत्तीसगढ़ सहित देश को झकझोर दिया था। हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं समेत बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी। घटना के बाद मामले की जांच, आरोपियों की पहचान और दोषियों को सजा दिलाने की प्रक्रिया लंबे समय तक चलती रही।

13 साल बाद फैसले का इंतजार खत्म होने की उम्मीद

करीब 13 वर्षों के बाद अब इस मामले में अदालत का फैसला आने जा रहा है। पीड़ित परिवारों, राजनीतिक दलों और आम लोगों की नजर NIA स्पेशल कोर्ट के निर्णय पर टिकी हुई है। अदालत का फैसला झीरम घाटी कांड से जुड़े लंबे कानूनी संघर्ष का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। निर्णय आने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए सबूतों और 101 गवाहों के बयानों को अदालत किस प्रकार देखती है।


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