होम
देश
दुनिया
राज्य
खेल
अध्यात्म
मनोरंजन
सेहत
जॉब अलर्ट
जरा हटके
फैशन/लाइफ स्टाइल

 

Breaking News: झीरम घाटी केस में बड़ा फैसला: 10 दोषियों को मृत्युदंड, अब हाईकोर्ट की पुष्टि पर टिकी नजर

Breaking News: झीरम घाटी केस में बड़ा फैसला: 10 दोषियों को मृत्युदंड, अब हाईकोर्ट की पुष्टि पर टिकी नजर

अशोक नायडू// जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी हत्याकांड मामले में अदालत के फैसले के बाद अब इस केस की कानूनी प्रक्रिया एक और अहम पड़ाव पर पहुंच गई है। NIA की विशेष अदालत ने मामले में दोषी ठहराए गए 10 आरोपियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। अब इस सजा पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया और छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की पुष्टि पर निगाहें टिकी हैं।

मामला वर्ष 2013 में हुए झीरम घाटी हमले से जुड़ा है। करीब 13 साल पुराने इस मामले में 5 सितंबर 2026 को NIA की विशेष अदालत ने सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया था। अदालत ने 16 सितंबर को सजा के निर्धारण की तारीख तय की थी।

10 दोषियों को मृत्युदंड

मामले में दोषी ठहराए गए 10 आरोपियों के खिलाफ अदालत ने गंभीर धाराओं में दोषसिद्धि के बाद मृत्युदंड की सजा सुनाई है। इससे झीरम घाटी मामले में न्यायिक प्रक्रिया का यह चरण बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। हालांकि, मृत्युदंड की सजा के बाद भी इसे तुरंत लागू नहीं किया जा सकता। ऐसे मामलों में उच्च न्यायालय की पुष्टि की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होती है।

अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट पर टिकी निगाहें

NIA कोर्ट के फैसले के बाद अब मामले की अगली कानूनी प्रक्रिया छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से जुड़ती है। मृत्युदंड की सजा की पुष्टि हाईकोर्ट द्वारा किया जाना आवश्यक होगा। यानी NIA विशेष अदालत द्वारा सुनाई गई सजा के बाद भी मामले में आगे न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी।

अपील के लिए 30 दिन का समय

अदालत ने दोषियों को फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए 30 दिनों का समय दिया है। इस दौरान दोषी पक्ष उच्च न्यायालय में सजा और दोषसिद्धि को चुनौती दे सकता है। इसलिए NIA कोर्ट का फैसला आने के बाद अब मामले की अगली लड़ाई उच्च न्यायालय में होने की संभावना है।

13 साल पुराना है झीरम घाटी मामला

25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र की झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर माओवादी हमला हुआ था। इस हमले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं सहित बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई थी। मृतकों में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, महेंद्र कर्मा और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल समेत कई प्रमुख नाम शामिल थे। इस मामले की जांच बाद में NIA ने अपने हाथ में ली थी। NIA के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार मामले में हत्या, हत्या के प्रयास, आपराधिक साजिश, हथियार कानून और UAPA समेत कई धाराओं के तहत जांच की गई थी।

101 गवाहों के बयान दर्ज हुए

झीरम घाटी मामले की सुनवाई लंबी चली। अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। शुरुआत में 11 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई चली थी, लेकिन ट्रायल के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई। इसके बाद 10 आरोपियों के खिलाफ मामला जारी रहा। अब NIA विशेष अदालत के सजा संबंधी फैसले के बाद मामले की अगली दिशा छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में होने वाली कानूनी कार्यवाही से तय होगी।


संबंधित समाचार