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INH News Impact: INH खबर का बड़ा असर, जब मंड़ी में कैबिनेट मंत्री ने लगाई आम की बोली

INH News Impact: INH खबर का बड़ा असर, जब मंड़ी में कैबिनेट मंत्री ने लगाई आम की बोली

INH News Impact: मध्य प्रदेश के आलीराजपुर जिले की स्थानीय कृषि उपज मंडी में आम उत्पादक आदिवासी किसानों के साथ हो रहे आर्थिक अन्याय और कम दामों को लेकर प्रमुख समाचार चैनल INH द्वारा प्रमुखता से प्रसारित की गई खबर का एक बड़ा और बेहद सकारात्मक असर देखने को मिला है। खबर के वायरल होते ही सूबे के कैबिनेट मंत्री श्री नागरसिंह चौहान मंगलवार को खुद एक्शन मोड में नजर आए। वे सीधे आलीराजपुर कृषि उपज मंडी पहुंचे और अपनी व्यक्तिगत मौजूदगी में व्यापारियों से आदिवासी किसानों के आमों की खुली और निष्पक्ष बोली लगवाई, जिससे किसानों को उनकी उपज का सही दाम मिल सका।

बता दें कि कि बीते रविवार और सोमवार को इसी मंडी में व्यापारियों द्वारा आम के बेहद कम दाम लगाए जाने पर नाराज किसानों ने भारी हंगामा कर दिया था। इस हंगामे के बीच स्थानीय आदिवासी संगठनों के कार्यकर्ताओं ने भी मौके पर पहुंचकर नीलाम प्रक्रिया को रुकवा दिया था। हालांकि, बाद में जिला प्रशासन के हस्तक्षेप और एक 'मॉडल रेट' तय करने की सहमति के बाद ही किसी तरह दोबारा नीलामी शुरू हो सकी थी। लेकिन INH की खोजी रिपोर्ट के बाद आज खुद प्रदेश के कद्दावर मंत्री को मैदान में उतरना पड़ा।

कैबिनेट मंत्री की खास सलाह

मंडी में तौल और नीलामी का खुद मुआयना करने के बाद कैबिनेट मंत्री नागरसिंह चौहान ने वहां मौजूद आदिवासी किसानों से सीधा संवाद किया। उन्होंने पारंपरिक खेती और बिक्री के ढर्रे से हटकर किसानों को आत्मनिर्भर बनने के लिए दो बड़े गुरुमंत्र दिए। मंत्री चौहान ने आदिवासी किसानों को सलाह दी कि वे सिर्फ कच्चा आम बेचने के बजाय आम से बनने वाले विभिन्न मूल्यवर्धित उत्पाद जैसे अचार, अमचूर, पल्प और जूस बनाकर बाजार में उतारें, जिससे उन्हें कई गुना अधिक मुनाफा होगा। उन्होंने कहा कि किसान सिर्फ मंडी के भरोसे न रहें, बल्कि खुले बाजार में भी जाकर अपनी फसल को सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाएं।

मंत्री ने की दो घोषणाएं 

गोडाउन की व्यवस्था: मंडी परिसर में ही किसानों के लिए सुरक्षित गोडाउन की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। यदि किसी दिन व्यापारियों की साठगांठ के कारण आम की बोली कम लगाई जाती है, तो किसान को घबराने या कम दाम में माल बेचने की जरूरत नहीं है। वे अपना माल मंडी के गोडाउन में पूरी तरह सुरक्षित रख सकते हैं और अगले दिनों में बेहतर दाम मिलने पर दोबारा बोली लगवा सकते हैं।

सीधे शिकायत का अधिकार: मंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि किसी भी आदिवासी किसान को यह महसूस होता है कि उसकी मेहनत की फसल का उचित दाम नहीं दिया जा रहा है या व्यापारी उनका शोषण कर रहे हैं, तो वे बिना किसी डर के तत्काल मंडी प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारियों से इसकी लिखित या मौखिक शिकायत दर्ज करा सकते हैं, जिस पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी।

कैबिनेट मंत्री के इस औचक दौरे और INH की खबर के इस बड़े इंपैक्ट के बाद आलीराजपुर के आम उत्पादक किसानों ने राहत की सांस ली है और क्षेत्र के आदिवासी समाज में इस त्वरित प्रशासनिक कदम की जमकर सराहना हो रही है।


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