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14 September : तीज और गणेश चतुर्थी का दुर्लभ संयोग, एक ही दिन होगी शिव-पार्वती और गणपति की पूजा

14 September : तीज और गणेश चतुर्थी का दुर्लभ संयोग, एक ही दिन होगी शिव-पार्वती और गणपति की पूजा

इस वर्ष धार्मिक कैलेंडर में एक बेहद खास और दुर्लभ संयोग बन रहा है। 14 सितंबर को हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी दोनों पर्व एक ही दिन मनाए जाएंगे। आमतौर पर हरतालिका तीज के बाद गणेश चतुर्थी का पर्व आता है, लेकिन इस बार तिथियों की विशेष स्थिति के कारण भगवान गणेश की स्थापना और भगवान शिव-माता पार्वती की आराधना एक ही दिन होगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस विशेष संयोग के चलते श्रद्धालुओं को एक ही दिन दो प्रमुख पर्वों की पूजा का अवसर मिलेगा। सुबह घरों में भगवान गणेश का विधिवत स्वागत और स्थापना की जाएगी, जबकि शाम के समय सुहागिन महिलाएं हरतालिका तीज का निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करेंगी।

तिथि परिवर्तन से बना विशेष धार्मिक संयोग

पंडितों और ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस बार तृतीया तिथि के विस्तार और दिन के मध्य भाग में चतुर्थी तिथि के प्रवेश के कारण यह स्थिति बनी है। दोनों पर्वों के पूजन का समय अलग-अलग होने के कारण श्रद्धालु एक ही दिन दोनों धार्मिक अनुष्ठान आसानी से कर सकेंगे। गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की स्थापना के लिए मध्याह्न काल को विशेष रूप से शुभ माना जाता है। वहीं हरतालिका तीज का व्रत सूर्योदय से शुरू होकर शाम के प्रदोष काल में मुख्य पूजा के साथ संपन्न किया जाता है। इस तरह 14 सितंबर को सुबह से लेकर शाम तक श्रद्धा और भक्ति का विशेष माहौल देखने को मिलेगा।

कई प्रमुख पंचांगों में एक जैसी गणना

देश के अलग-अलग क्षेत्रों में प्रचलित प्रमुख पंचांगों की गणना में भी इस विशेष तिथि को लेकर समानता दिखाई दे रही है। नीमच का निर्णय सागर पंचांग, जबलपुर का भुवन विजय पंचांग, वाराणसी क्षेत्र के पंचांग और रायपुर के देव पंचांग सहित विभिन्न गणनाओं में हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का संयोग एक ही दिन बताया गया है। पंचांगों के अनुसार तृतीया और चतुर्थी तिथि के समय में बने विशेष तालमेल के कारण दोनों पर्वों के धार्मिक अनुष्ठान 14 सितंबर को संपन्न होंगे।

सुबह गणपति स्थापना, शाम को हरतालिका तीज की पूजा

धार्मिक जानकारों के अनुसार, श्रद्धालु सुबह और दोपहर के शुभ समय में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर सकते हैं। पूजा के दौरान गणपति को मोदक और अन्य प्रिय भोग अर्पित किए जाएंगे। इसके बाद हरतालिका तीज का व्रत रखने वाली महिलाएं शाम के समय भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या स्वरूप बनाकर विधिवत पूजा करेंगी। प्रदोष काल में पूजा, व्रत कथा, आरती और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान किए जाएंगे।

व्रत और पूजा को लेकर भ्रम की जरूरत नहीं

धार्मिक विद्वानों का कहना है कि श्रद्धालुओं को दोनों पर्वों की तिथि एक होने को लेकर किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी की पूजा का निर्धारित समय अलग-अलग है, इसलिए दोनों अनुष्ठान अपनी धार्मिक परंपराओं के अनुसार किए जा सकते हैं। हरतालिका तीज का मुख्य पूजन शाम और प्रदोष काल में होता है, जबकि गणपति स्थापना के लिए दिन का मध्याह्न समय महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी कारण एक ही दिन दोनों पर्व होने के बावजूद पूजा-विधि में किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी।

दिनभर रहेगा भक्ति और उत्सव का माहौल

14 सितंबर का दिन इस बार धार्मिक दृष्टि से विशेष रहने वाला है। सुबह घरों और मंदिरों में गणपति बप्पा के जयकारे सुनाई देंगे, जबकि शाम होते ही शिव और माता पार्वती की आराधना से वातावरण भक्तिमय हो जाएगा। एक ही दिन दो बड़े धार्मिक पर्वों के आयोजन से श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिल सकता है। घरों में पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और पारंपरिक अनुष्ठानों का सिलसिला सुबह से लेकर देर शाम तक जारी रहेगा।


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