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वॉशिंगटन में ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक: गाजा पुनर्निर्माण के लिए अरबों डॉलर का वादा, कई देशों ने उठाए सवाल...

वॉशिंगटन में ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक: गाजा पुनर्निर्माण के लिए अरबों डॉलर का वादा, कई देशों ने उठाए सवाल...

वॉशिंगटन। गाजा में युद्ध के बाद शांति और पुनर्निर्माण की दिशा में एक नई पहल के तहत अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन में “बोर्ड ऑफ पीस” की पहली आधिकारिक बैठक आयोजित की गई। बैठक में लगभग 50 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें 27 देश औपचारिक सदस्य के रूप में शामिल हुए, जबकि भारत और कई यूरोपीय देश ऑब्जर्वर के तौर पर मौजूद रहे। यह बैठक United States Institute of Peace में आयोजित की गई, जहां गाजा के पुनर्निर्माण के लिए अरबों डॉलर की सहायता की घोषणा की गई।

अमेरिका का 10 अरब डॉलर का वादा:

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने घोषणा की कि गाजा को दोबारा बसाने के लिए विभिन्न देशों ने मिलकर करीब 7 अरब डॉलर देने का आश्वासन दिया है। वहीं अमेरिका स्वयं बोर्ड ऑफ पीस के लिए 10 अरब डॉलर का योगदान देगा। हालांकि, United Nations की एक रिपोर्ट के मुताबिक गाजा के पूर्ण पुनर्निर्माण के लिए 70 अरब डॉलर से अधिक की आवश्यकता होगी। ऐसे में घोषित फंड को शुरुआती कदम माना जा रहा है।

इंडोनेशिया भेजेगा 8 हजार सैनिक:

बैठक में शामिल Prabowo Subianto ने गाजा में प्रस्तावित इंटरनेशनल स्टेबलाइजेशन फोर्स के तहत 8 हजार सैनिक तैनात करने की घोषणा की। उनका कहना था कि क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना जरूरी है। मिस्र ने भी फिलिस्तीनी पुलिस को प्रशिक्षण जारी रखने और पुनर्निर्माण प्रक्रिया में सहयोग देने की प्रतिबद्धता दोहराई।

‘गाजा के लिए प्लान बी नहीं’- मार्को रुबियो:

अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने बैठक के बाद कहा कि गाजा के भविष्य के लिए बोर्ड ऑफ पीस अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, “गाजा के लिए कोई प्लान बी नहीं है। प्लान बी का अर्थ है फिर से युद्ध की ओर लौटना, और बैठक में शामिल कोई भी देश ऐसा नहीं चाहता।” उन्होंने जोर देकर कहा कि उद्देश्य ऐसा गाजा बनाना है जहां लोग शांति और स्थिरता के साथ रह सकें।

दावोस में हुई थी पहल की घोषणा:

गौरतलब है कि बोर्ड ऑफ पीस की घोषणा पिछले महीने World Economic Forum Annual Meeting के दौरान दावोस में की गई थी। राष्ट्रपति ट्रंप ने तब कहा था कि यह बोर्ड केवल गाजा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में अन्य वैश्विक संघर्षों के समाधान में भी भूमिका निभाएगा। सूत्रों के मुताबिक, तीन वर्ष से अधिक समय तक सदस्य बने रहने वाले देशों को 1 अरब डॉलर का योगदान देना होगा।

ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी ने जताई आपत्ति:

कई पश्चिमी देशों जिनमें United Kingdom, France और Germany शामिल हैं, ने इस बोर्ड में शामिल होने से इनकार कर दिया। इन देशों का आरोप है कि यह पहल संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को कमजोर कर सकती है। ब्राजील के राष्ट्रपति Luiz Inácio Lula da Silva ने भी आरोप लगाया कि यह कदम “एक नए संयुक्त राष्ट्र” की स्थापना जैसा है, जिसका नियंत्रण अमेरिका के हाथों में होगा। आलोचकों का कहना है कि यदि बोर्ड को वैश्विक अधिकार दिए गए, तो यह किसी भी देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप का माध्यम बन सकता है।

क्यों पड़ी बोर्ड ऑफ पीस की जरूरत:

7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा इजरायल पर हमले के बाद क्षेत्र में भीषण संघर्ष छिड़ गया। इजरायली कार्रवाई में गाजा का बड़ा हिस्सा तबाह हो गया। स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार हजारों लोगों की जान गई और लाखों लोग बेघर हुए। अमेरिका की मध्यस्थता से युद्धविराम लागू होने के बाद पुनर्निर्माण की प्रक्रिया पर जोर दिया गया। इसी कड़ी में बोर्ड ऑफ पीस की अवधारणा सामने आई, जिसकी पहली औपचारिक बैठक अब वॉशिंगटन में संपन्न हुई। बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक गाजा के पुनर्निर्माण की दिशा में एक अहम कूटनीतिक पहल मानी जा रही है। जहां एक ओर अमेरिका और कुछ सहयोगी देश इसे स्थायी शांति की दिशा में बड़ा कदम बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई राष्ट्र इसे संयुक्त राष्ट्र की भूमिका के समानांतर खड़ा करने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं। आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि यह बोर्ड वैश्विक कूटनीति में नई दिशा तय करता है या फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक और विवाद का कारण बनता है।


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