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डेस्क जॉब करने वाले रहें सावधान! पैरों में खून का थक्का बनने के जोखिम को न करें नजरअंदाज

डेस्क जॉब करने वाले रहें सावधान! पैरों में खून का थक्का बनने के जोखिम को न करें नजरअंदाज

लंबे समय तक ऑफिस में बैठकर काम करना, लगातार स्क्रीन देखना और घंटों ऑनलाइन गेमिंग या OTT प्लेटफॉर्म पर समय बिताना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, लंबे समय तक शारीरिक गतिविधि कम रहने से पैरों की नसों में खून का प्रवाह धीमा पड़ सकता है, जिससे डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT) यानी गहरी नसों में खून का थक्का जमने का खतरा बढ़ सकता है। गंभीर मामलों में यह थक्का फेफड़ों तक पहुंचकर जानलेवा स्थिति पैदा कर सकता है।

क्या है डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT)?

डीप वेन थ्रोम्बोसिस एक ऐसी चिकित्सकीय स्थिति है, जिसमें शरीर की गहरी नसों में खून का थक्का बन जाता है। यह समस्या अक्सर पैरों में देखी जाती है। थक्का बनने से रक्त का सामान्य प्रवाह प्रभावित हो सकता है और पैरों में सूजन, दर्द या भारीपन जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं। समय पर पहचान और इलाज नहीं मिलने पर यह थक्का टूटकर रक्त के साथ फेफड़ों तक पहुंच सकता है। ऐसी स्थिति को पल्मोनरी एम्बोलिज्म कहा जाता है, जो गंभीर और जानलेवा हो सकती है। इसलिए DVT के संभावित लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

लंबे समय तक बैठने से क्यों बढ़ता है खतरा?

आजकल डेस्क जॉब, वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन गेमिंग और OTT प्लेटफॉर्म के बढ़ते इस्तेमाल के कारण लोग कई-कई घंटे एक ही जगह बैठे रहते हैं। इस दौरान पैरों की मांसपेशियों की गतिविधियां कम हो जाती हैं। सामान्य तौर पर पैरों की मांसपेशियां नसों के माध्यम से खून को वापस हृदय की ओर पहुंचाने में मदद करती हैं। जब व्यक्ति लंबे समय तक बिना हिले-डुले बैठा रहता है, तो यह प्रक्रिया धीमी हो सकती है। इससे कुछ लोगों में नसों के भीतर खून का थक्का बनने का जोखिम बढ़ जाता है। पहले DVT को मुख्य रूप से बुजुर्गों या अस्पताल में भर्ती मरीजों से जुड़ी समस्या माना जाता था, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक निष्क्रिय रहने की आदत के कारण युवा और कामकाजी लोगों को भी इसके जोखिम के प्रति जागरूक रहने की जरूरत है।

रिसर्च में सामने आया लंबे समय तक बैठने का जोखिम

Scientific Reports में प्रकाशित एक शोध में लंबे समय तक बैठे रहने और वेनस थ्रोम्बोएम्बोलिज्म (VTE) के जोखिम के बीच संबंध देखा गया। रिपोर्ट में बताया गया कि सबसे अधिक समय तक बैठे रहने वाले लोगों में VTE का जोखिम कम बैठने वालों की तुलना में लगभग 24 प्रतिशत अधिक था। शोध में दिनभर बैठने के समय में हर अतिरिक्त घंटे के साथ जोखिम में लगभग 2 प्रतिशत वृद्धि का संबंध भी सामने आया। हालांकि, इन आंकड़ों को किसी व्यक्ति के लिए निश्चित जोखिम नहीं माना जाना चाहिए। वास्तविक खतरा उसकी उम्र, स्वास्थ्य, गतिविधियों और अन्य जोखिम कारकों पर भी निर्भर करता है।

डॉक्टरों ने डेस्क जॉब करने वालों को किया सतर्क

वैस्कुलर विशेषज्ञों ने लंबे समय तक बैठे रहने की आदत को लेकर चिंता जताई है। VSI-ASVS 2026 के आयोजन सचिव और नई दिल्ली स्थित मैक्स हॉस्पिटल में वैस्कुलर एवं एंडोवैस्कुलर सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. तापिश साहू के अनुसार, उनकी ओपीडी में ऐसे युवा मरीज भी आ रहे हैं, जिनमें DVT से मिलते-जुलते लक्षण दिखाई दे रहे हैं। लंबे समय तक डेस्क जॉब करना, स्क्रीन के सामने बैठे रहना और गेमिंग जैसी आदतें इस समस्या के जोखिम से जुड़ी हो सकती हैं। वहीं, पेरिफेरल वैस्कुलर एवं एंडोवैस्कुलर साइंसेज के सीनियर डायरेक्टर डॉ. तरुण ग्रोवर ने बताया कि मरीजों की जांच के दौरान उनकी दिनचर्या और स्क्रीन के सामने बिताए जाने वाले समय के बारे में भी जानकारी लेना महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक निष्क्रिय रहने की आदत को कम करना वैस्कुलर हेल्थ के लिए जरूरी है।

लगातार बैठे रहना क्यों हो सकता है नुकसानदायक?

वैस्कुलर सोसाइटी ऑफ इंडिया के वरिष्ठ वैस्कुलर एवं एंडोवैस्कुलर सर्जन डॉ. भूपेश गर्ग के मुताबिक, लंबे समय तक बैठे रहने से भी ब्लड क्लॉट का खतरा बढ़ सकता है। इसका एक प्रमुख कारण पैरों की काफ मसल्स की गतिविधियों में कमी आना है। जब पैरों की मांसपेशियां लंबे समय तक सक्रिय नहीं रहतीं, तो नसों के जरिए खून की वापसी धीमी हो सकती है। इससे कुछ परिस्थितियों में गहरी नसों में खून का थक्का बनने की आशंका बढ़ जाती है। हालांकि, लंबे समय तक बैठना और धूम्रपान शरीर पर अलग-अलग तरीकों से असर डालते हैं; दोनों के जोखिमों को बिल्कुल समान नहीं माना जाना चाहिए।

DVT के लक्षण क्या हैं?

DVT के संभावित लक्षणों में शामिल हैं:

एक पैर में अचानक या असामान्य सूजन।

पिंडली या पैर में दर्द और दबाव महसूस होना।

प्रभावित हिस्से में गर्माहट।

त्वचा का लाल या रंग बदला हुआ दिखाई देना।

पैर में भारीपन या असहजता।

कुछ लोगों में DVT के स्पष्ट लक्षण नहीं भी दिखाई देते। केवल लक्षणों के आधार पर इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती; इसके लिए डॉक्टर की जांच और जरूरत पड़ने पर अल्ट्रासाउंड जैसे परीक्षण किए जाते हैं।

ऑफिस में काम करने वाले लोग DVT से कैसे बचें?

लंबे समय तक बैठने से जुड़े जोखिम को कम करने के लिए रोजमर्रा की दिनचर्या में कुछ बदलाव किए जा सकते हैं।

1. नियमित अंतराल पर उठें: काम के दौरान बीच-बीच में खड़े हों और थोड़ी देर चलें। संभव हो तो हर 30 से 60 मिनट में अपनी स्थिति बदलने की आदत बनाएं।

2. पैरों को सक्रिय रखें: बैठे-बैठे टखनों को ऊपर-नीचे करना और पैरों को हल्का हिलाना उपयोगी हो सकता है। हालांकि, यह चलने-फिरने का विकल्प नहीं है।

3. रोजाना शारीरिक गतिविधि करें: अपनी क्षमता के अनुसार नियमित पैदल चलना और व्यायाम करना दिनचर्या में शामिल करें।

4. लगातार स्क्रीन देखने से बचें: काम या मनोरंजन के दौरान छोटे-छोटे ब्रेक लें और लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठे रहने से बचें।

5. जोखिम कारकों पर ध्यान दें: पहले DVT हो चुका हो, हाल में बड़ी सर्जरी हुई हो, लंबे समय तक अस्पताल में रहना पड़ा हो या अन्य जोखिम कारक हों, तो डॉक्टर से व्यक्तिगत बचाव के उपायों पर सलाह लें।

कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?

यदि एक पैर में अचानक सूजन, दर्द या गर्माहट महसूस हो, तो जल्द से जल्द चिकित्सकीय जांच कराएं। यदि अचानक सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, खून वाली खांसी या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो यह फेफड़ों में खून का थक्का पहुंचने का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें। डेस्क जॉब और स्क्रीन आधारित जीवनशैली के बीच लंबे समय तक लगातार बैठे रहने की आदत को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। नियमित रूप से उठना, चलना और पैरों को सक्रिय रखना सेहत के लिए फायदेमंद है। यदि DVT के लक्षण दिखाई दें, तो खुद से इलाज करने के बजाय डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर जांच और उचित उपचार गंभीर जटिलताओं से बचाने में मदद कर सकते हैं।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यह डॉक्टर की सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है।


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