राजीव मिश्रा, दतिया : मध्य प्रदेश के दतिया जिले में स्थित खैरी वाली माता का मंदिर भक्तों के लिए आस्था और चमत्कार का बड़ा केंद्र है। खास बात यह है कि यहां माता दिनभर तीन अलग-अलग रूपों में दर्शन देती हैं। सुबह बाल्य रूप, दोपहर में युवावस्था और शाम को वृद्धावस्था का स्वरूप धारण कर माता भक्तों को आशीर्वाद देती हैं।
400 साल पुराना मंदिर
जिला मुख्यालय से लगभग 7 किलोमीटर दूर पहाड़ी पर बसे इस प्राचीन मंदिर को करीब 400 साल पुराना माना जाता है। लोक मान्यता है कि दतिया रियासत के महाराजा वीर सिंह देव को स्वप्न में देवी का आभास हुआ था और आदेश दिया गया कि उन्हें सेवड़ा के संकुआ धाम से खैरगढ़ गांव में स्थापित किया जाए। खैर के पेड़ों से घिरे इस स्थान को बाद में खैरी गांव कहा जाने लगा और यहीं से माता को “खैरी वाली माता” नाम मिला।
तीन रूप, बचपन, जवानी और बुढ़ापा
भक्त मानते हैं कि देवी के तीन रूप जीवन के तीन पड़ाव का संदेश देते हैं—बचपन, जवानी और बुढ़ापा। यही वजह है कि श्रद्धालु यहां आकर न केवल सुख-समृद्धि और रक्षा की कामना करते हैं बल्कि जीवन जीने का गहरा संदेश भी पाते हैं। शारदीय नवरात्रि में मंदिर में विशेष रौनक रहती है। सप्तमी पर यहां विशाल मेला लगता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। पिछले 25 वर्षों से इस दिन भंडारे का आयोजन भी होता है, जिसमें करीब 50 से 60 हजार लोग प्रसादी ग्रहण करते हैं।
होती है बाधांए दूर
मंदिर से जुड़ा एक प्रसिद्ध नारा भी है—“सो वेरी और एक खैरी।” मान्यता है कि चाहे कितने भी शत्रु क्यों न हों, माता के नाम से सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं। सुबह चार बजे से शुरू होकर देर रात तक यहां दर्शन का क्रम चलता है। भक्तों का कहना है कि खैरी वाली माता केवल पूजा का स्थल नहीं, बल्कि जीवन का दर्शन कराती हैं और यही कारण है कि आस्था हर साल और प्रबल होती जा रही है।