नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से चुनाव आयोग के कामकाज और कुछ फैसलों की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए CEC के निलंबन सहित कई मांगें रखी गईं। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल ज्ञानेश कुमार के निलंबन की मांग स्वीकार नहीं की और चुनाव आयोग से इस मामले में जवाब मांगा। सुप्रीम कोर्ट की पीठ में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे। सुप्रीम कोर्ट की 5 अक्टूबर 2026 की cause list में भी यही पीठ दर्ज है।
याचिकाओं में चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर उठे सवाल
याचिकाकर्ताओं राकेश कुमार सिंह और अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से दायर याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग के कुछ निर्णय निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं लिए गए। याचिकाओं में विशेष रूप से Special Intensive Revision (SIR), फॉर्म-6 में कथित बदलाव और आयोग के अन्य फैसलों को लेकर आपत्तियां उठाई गई हैं। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि चुनाव आयोग के फैसले कानून के अनुसार सामूहिक रूप से लिए जाने चाहिए। उनके अनुसार जहां संभव हो वहां सर्वसम्मति और आवश्यकता पड़ने पर बहुमत के आधार पर निर्णय लिया जाना चाहिए।
CEC को निलंबित करने की मांग क्यों उठी?
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने CEC के कामकाज से जुड़े कई मुद्दे अदालत के सामने रखे। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा कानूनी व्यवस्था ने मुख्य चुनाव आयुक्त को व्यापक संरक्षण और अधिकार दिए हैं। वकील की ओर से यह भी दलील दी गई कि CEC को पद से निलंबित किया जाए और बाकी चुनाव आयुक्तों को आयोग का कामकाज जारी रखने दिया जाए। याचिकाकर्ताओं ने नियुक्ति प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की भूमिका वाली पहले की व्यवस्था बहाल करने की मांग भी रखी।
CEC को मिली कानूनी सुरक्षा का भी उठा मुद्दा
बहस के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा का मुद्दा भी सामने आया। याचिकाकर्ता पक्ष ने दलील दी कि मौजूदा कानून में CEC को पद छोड़ने के बाद भी कुछ मामलों में संरक्षण प्राप्त है। इस पर पीठ की ओर से कहा गया कि संबंधित कानूनी प्रावधान को चुनौती देने वाला मामला पहले से लंबित है। याचिकाकर्ता पक्ष ने स्पष्ट किया कि मौजूदा याचिका में मुख्य रूप से चुनाव आयोग के कामकाज और फैसले लेने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- पहले चुनाव आयोग का जवाब आने दें
सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि केवल मीडिया रिपोर्ट के आधार पर कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि पहले चुनाव आयोग का जवाब सामने आना जरूरी है। पीठ ने यह भी कहा कि एक अनिवार्य कानूनी व्यवस्था मौजूद है और उम्मीद है कि संवैधानिक संस्था ने कानून का पालन किया होगा। यदि बाद में यह पाया जाता है कि कानून का उल्लंघन हुआ है, तो अदालत उचित कार्रवाई पर विचार कर सकती है। याचिकाकर्ता पक्ष ने इसके जवाब में चुनाव प्रक्रिया के दौरान अंतरिम राहत की मांग की। उनका तर्क था कि यदि चुनाव प्रक्रिया पूरी होने और सरकार बनने के बाद किसी निर्णय को चुनौती दी जाती है तो स्थिति को पलटना व्यावहारिक रूप से कठिन हो सकता है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने CEC ज्ञानेश कुमार के निलंबन की मांग को स्वीकार नहीं किया है और चुनाव आयोग से जवाब मांगा है। मामले में आगे की कार्यवाही आयोग के जवाब और अदालत के समक्ष रखे जाने वाले दस्तावेजों पर निर्भर करेगी। चुनाव आयोग से जुड़ा SIR विवाद इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का विषय रहा है। सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर SIR से संबंधित पूर्व मामले में भी चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के संशोधन से जुड़े कानूनी सवाल दर्ज हैं।