ODI World Cup 2027: भारतीय क्रिकेट को एक और युवा सितारा मिल चुका है। महज 15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने अंतरराष्ट्रीय टी20 क्रिकेट में अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से क्रिकेट जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अब चर्चा सिर्फ टी20 तक सीमित नहीं है, बल्कि सवाल यह उठने लगा है कि क्या उन्हें 2027 वनडे विश्व कप के लिए भारतीय टीम में जगह मिलनी चाहिए? इस बहस को और हवा तब मिली जब भारत के पूर्व विकेटकीपर-बल्लेबाज फारुख इंजीनियर ने खुलकर कहा कि वैभव अब वनडे टीम में जगह पाने के हकदार हैं।
फारुख इंजीनियर ने क्यों जताया भरोसा?
88 वर्षीय फारुख इंजीनियर का मानना है कि टी20 और वनडे क्रिकेट के बीच अंतर को जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर देखा जाता है। उनके मुताबिक, यदि कोई बल्लेबाज लगातार रन बना रहा है और नई गेंद के खिलाफ आत्मविश्वास के साथ खेल सकता है, तो उसे वनडे क्रिकेट में भी मौका मिलना चाहिए। इंजीनियर का मानना है कि वैभव की आक्रामक शुरुआत किसी भी मुकाबले का रुख बदल सकती है। उनका कहना है कि यदि शुरुआती ओवरों में टीम को तेज शुरुआत मिलती है तो बाकी बल्लेबाजों के लिए लंबी पारी खेलना आसान हो जाता है।
क्या टी20 की सफलता वनडे में भी काम आएगी?
हालांकि क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि वनडे क्रिकेट की चुनौतियां टी20 से काफी अलग होती हैं। टी20 में 30-40 गेंदों की तेज पारी मैच जिता सकती है, लेकिन वनडे में कई बार बल्लेबाज को 100 गेंद या उससे अधिक समय तक टिककर खेलना पड़ता है। वनडे में बल्लेबाज को परिस्थितियों के अनुसार खेल बदलना, साझेदारी बनाना और जरूरत पड़ने पर स्ट्राइक रोटेट करना भी आना चाहिए। यही वजह है कि वैभव की असली परीक्षा अभी बाकी मानी जा रही है।
वनडे में निभानी होगी कई भूमिकाएं
टी20 में वैभव की भूमिका पावरप्ले में तेजी से रन बनाकर विपक्षी गेंदबाजों पर दबाव बनाने की रही है। लेकिन वनडे क्रिकेट में बल्लेबाज को नई गेंद का सामना करना, बीच के ओवरों में स्पिनरों के खिलाफ समझदारी से खेलना, स्ट्राइक रोटेट करना, साझेदारी बनाना, और अंतिम ओवरों में फिर आक्रामक बल्लेबाजी करना जैसी कई जिम्मेदारियां निभानी होती हैं। यानी एक ही पारी में अलग-अलग परिस्थितियों के हिसाब से खुद को ढालना पड़ता है।
क्या चयनकर्ताओं को जल्दबाजी करनी चाहिए?
क्रिकेट विशेषज्ञों की राय है कि वैभव की प्रतिभा पर कोई सवाल नहीं है, लेकिन उन्हें सीधे विश्व कप टीम में शामिल करने से पहले पर्याप्त तैयारी जरूरी होगी। चयनकर्ताओं के पास अभी समय है और इस दौरान उन्हें घरेलू लिस्ट-ए क्रिकेट, भारत-ए के दौरे, और सीमित वनडे मुकाबलों में मौका देकर उनकी क्षमता का सही आकलन किया जा सकता है। विश्व कप में प्रयोग की गुंजाइश नहीं वनडे विश्व कप ऐसा मंच है जहां अनुभव और मानसिक मजबूती का महत्व प्रतिभा जितना ही होता है।टीम में वही खिलाड़ी जगह बनाते हैं जिन्होंने बड़े मैचों का दबाव झेलने की क्षमता साबित की हो। ऐसे में वैभव सूर्यवंशी के पास प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन भारतीय टीम के लिए सबसे समझदारी भरा फैसला यही होगा कि उन्हें चरणबद्ध तरीके से तैयार किया जाए। यदि उनका विकास इसी गति से जारी रहा तो वे केवल 2027 World Cup ही नहीं, बल्कि आने वाले कई वर्षों तक भारतीय क्रिकेट की सबसे बड़ी ताकत बन सकते हैं।