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Hata news : नगर भ्रमण में निकले भगवान जगन्नाथ, केबिनेट मंत्री प्रहलाद पटेल ने 149वीं रथयात्रा का किया शुभारंभ

Hata news : नगर भ्रमण में निकले भगवान जगन्नाथ, केबिनेट मंत्री प्रहलाद पटेल ने 149वीं रथयात्रा का किया शुभारंभ

हटा : मध्य प्रदेश सहित देशभर में आज भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा धूमधाम के साथ निकाली गई। यह यात्रा हर साल आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से शुरू होती है और नवें दिन 'बहुदा यात्रा' (वापसी यात्रा) के साथ संपन्न होती है। इसी कड़ी में आज रथ यात्रा का हिस्सा बनने के लिए  कैबिनेट मंत्री प्रह्लाद पटेल हटा के देव बालाजी मंदिर पहुंचे और पूजा-अर्चना कर भगवान का आशीर्वाद लिया। साथ ही रस्सी खींचकर रथ यात्रा का शुभारंभ किया। 

सुरक्षा के कड़े इंतजाम 

भगवान जगन्नाथ जी की रथयात्रा गाजे-बाजों और जयघोष के बीच धूमधाम के साथ नगर भ्रमण के लिए निकाली गई। सुरक्षा को लेकर चयनित जगहों पर कड़े इंतजाम किये गए है। तो वही इस बीच मंत्री प्रह्लाद पटेल ने रथ की रस्सी खींचकर यात्रा का शुभारंभ किया और क्षेत्रवासियों के सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की।

ब्रह्मकुमारी आश्रम भी पहुँचे मंत्री पटेल 

इसके बाद मंत्री पटेल प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के आश्रम भी पहुंचे। वहां उन्होंने ब्रह्मा बाबा को श्रद्धांजलि अर्पित कर ध्यान किया। ब्रह्माकुमारी सुश्री मीरा बहन ने उनका स्वागत किया और आश्रम में संचालित आध्यात्मिक एवं सामाजिक गतिविधियों की जानकारी दी। इस अवसर पर देव बालाजी मंदिर के महंत हरिराम दास महाराज, रामगोपाल मंदिर के महंत श्यामदास महाराज, रथयात्रा आयोजन समिति के सदस्य और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। बता दें कि भगवान जगन्नाथ की यह 149वीं रथयात्रा है। 

क्या है मान्यता 

मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण के अवतार माने जाने वाले भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलराम और अपनी बहन सुभद्रा के साथ हर साल उड़ीसा के पुरी शहर में रथ की सवारी करने निकलते हैं और इस यात्रा को दुनिया भर में रथ यात्रा के नाम से जाना जाता है.

तीन सौ साल पुराना है इतिहास

इस रथ यात्रा का इतिहास तीन सौ साल पुराना है. कहते हैं तीन सौ साल पूर्व वैष्णव सम्रदाय द्वारा पूर्णिया सिटी में जगन्नाथ मंदिर की स्थापना की गई थी और उसी समय से हर वर्ष आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि को रथ यात्रा निकाली जाती है. ऐसी मान्यता है कि साल में एक बार भगवान न केवल भक्तों को स्वयं चल कर दर्शन देते हैं बल्कि अपने नगर की स्थिति का जायजा भी लेते हैं.

 

 


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