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बिलासपुर नसबंदी कांड: 12 साल बाद फैसला: डॉक्टर आरके गुप्ता को 2 साल की सजा 5, आरोपी बरी...

बिलासपुर नसबंदी कांड: 12 साल बाद फैसला: डॉक्टर आरके गुप्ता को 2 साल की सजा 5, आरोपी बरी...

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 2014 नसबंदी कांड में आखिरकार 12 साल बाद न्यायालय का फैसला सामने आ गया है। इस दर्दनाक मामले में 12 महिलाओं की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराए गए डॉक्टर आरके गुप्ता को अदालत ने गैर इरादतन हत्या का दोषी मानते हुए 2 साल की सजा सुनाई है। वहीं, इस केस में शामिल अन्य 5 आरोपियों को कोर्ट ने बरी कर दिया है। यह मामला उस समय पूरे देश में सुर्खियों में आ गया था, जब एक सरकारी नसबंदी शिविर के बाद महिलाओं की अचानक तबीयत बिगड़ने लगी और देखते ही देखते 12 महिलाओं की मौत हो गई। इस घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।

क्या था पूरा मामला?

साल 2014 में बिलासपुर के सकरी स्थित नेमिचंद्र अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक नसबंदी शिविर आयोजित किया गया था। इस शिविर में करीब 85 महिलाओं का ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के कुछ ही घंटों बाद महिलाओं की हालत बिगड़ने लगी। उन्हें इलाज के लिए भर्ती कराया गया, लेकिन एक के बाद एक 12 महिलाओं की मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे प्रदेश में हड़कंप मच गया था और मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया। जांच में दवाइयों की गुणवत्ता और ऑपरेशन प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही सामने आई थी।

कोर्ट का फैसला

लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने डॉक्टर आरके गुप्ता को गैर इरादतन हत्या (IPC धारा 304) का दोषी माना और उन्हें 2 साल की सजा सुनाई। वहीं, महावर फार्मा कंपनी से जुड़े 5 अन्य आरोपियों को सबूतों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया गया।

जिम्मेदारी और सवाल

इस मामले में तत्कालीन सीएमएचओ पर भी कार्रवाई हुई थी। हालांकि, इतने बड़े हादसे में केवल एक डॉक्टर को सजा और बाकी आरोपियों के बरी होने पर एक बार फिर सिस्टम की जवाबदेही पर सवाल उठने लगे हैं।

क्यों अहम है यह फैसला?

यह फैसला न केवल पीड़ित परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि देशभर में चलने वाले सरकारी स्वास्थ्य अभियानों की गुणवत्ता और निगरानी पर भी एक बड़ा संदेश देता है।


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