नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति से जुड़ी एक अहम कानूनी खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) की उस याचिका पर राहत देने से इनकार कर दिया है, जिसमें पार्टी ने करीब 804 करोड़ रुपये वाले चार डेबिट-फ्रीज बैंक खातों को संचालित करने की अनुमति मांगी थी। जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस पी.बी. वराले की पीठ ने कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस समय मामले के गुण-दोष में नहीं जाना चाहता और संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने के लिए इच्छुक नहीं है। शीर्ष अदालत ने कलकत्ता हाईकोर्ट से मामले की सुनवाई में तेजी लाने का अनुरोध किया है। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न से जुड़ा विवाद अभी न्यायिक प्रक्रिया में है और इन बैंक खातों में मौजूद रकम पर अधिकार को लेकर भी सवाल लंबित है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने इस स्तर पर रकम के अधिकार को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया।
चार बैंक खातों में करीब 804 करोड़ रुपये
मामला पश्चिम बंगाल पुलिस की ओर से डेबिट-फ्रीज किए गए चार बैंक खातों से जुड़ा है। इन खातों में करीब 804 करोड़ रुपये होने की बात अदालत के समक्ष रखी गई थी। TMC ने इन खातों को संचालित करने की अनुमति मांगते हुए फ्रीजिंग के आधार से जुड़ी FIR में प्रक्रियागत कमियों का भी मुद्दा उठाया था। इससे पहले 27 अगस्त 2026 को कलकत्ता हाईकोर्ट ने भी TMC की इस मांग पर अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि चार खातों को सीधे संचालित करने की अनुमति देने से उसके पहले के उस आदेश पर असर पड़ेगा, जिसके तहत पार्टी को रोजमर्रा के खर्चों के लिए सीमित वित्तीय सुविधा दी गई थी।
TMC को पहले से मिली है सीमित वित्तीय राहत
इस विवाद में कलकत्ता हाईकोर्ट ने पहले पार्टी के कुछ अन्य फ्रीज खातों से रोजमर्रा के खर्च और कर्मचारियों के वेतन जैसे आवश्यक भुगतान करने की अनुमति विशेष अधिकारी की निगरानी में दी थी। अगस्त में हाईकोर्ट ने 804 करोड़ रुपये वाले चार अन्य खातों के संचालन के लिए अतिरिक्त अंतरिम राहत देने से इनकार किया।
अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद फिलहाल इन चार खातों को सीधे संचालित करने की TMC की मांग पर राहत नहीं मिली है। हालांकि, शीर्ष अदालत ने मामले का अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट को मामले की सुनवाई तेजी से पूरी करने का अनुरोध किया है। यानी 804 करोड़ रुपये से जुड़े बैंक खातों का अंतिम कानूनी विवाद अभी लंबित है और आगे की स्थिति कलकत्ता हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई से स्पष्ट होगी।