रायपुर: आदिवासी समाज के युवाओं और छात्रों को संगठन से जोड़ने की दिशा में अखिल भारतीय आदिवासी कांग्रेस ने नई पहल शुरू की है। संगठन की ओर से ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के लिए एक विशेष समिति का गठन किया गया है। इस समिति की राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले की जिला पंचायत सदस्य आशिका कुजूर को सौंपी गई है। इस अभियान के जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले आदिवासी छात्र-छात्राओं और युवाओं से सीधे संपर्क स्थापित कर उनकी समस्याओं और अपेक्षाओं को समझने की योजना है।
देशभर के आदिवासी छात्रों तक पहुंचेगा अभियान
‘छात्रों की गूंज’ अभियान के तहत विशेष समिति आदिवासी छात्रावासों और युवा समूहों तक पहुंचेगी। यहां छात्र-छात्राओं से संवाद कर उनकी शिक्षा, भविष्य, अधिकारों और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों से जुड़ी समस्याओं को समझने का प्रयास किया जाएगा। अभियान में युवाओं के विचारों और सुझावों को भी प्रमुखता दी जाएगी। संगठन का कहना है कि युवाओं की आवाज को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के लिए जमीनी स्तर पर संवाद जरूरी है।
आशिका कुजूर को क्यों सौंपी गई कमान?
जशपुर जिला पंचायत सदस्य आशिका कुजूर लंबे समय से छात्र-युवा हितों, शिक्षा, ग्रामीण विकास और आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दों को लेकर सक्रिय रही हैं। जमीनी स्तर पर उनकी सक्रियता को देखते हुए उन्हें अभियान की राष्ट्रीय जिम्मेदारी दी गई है। राष्ट्रीय संयोजक के तौर पर वह देशभर में अभियान से जुड़े कार्यक्रमों के समन्वय और आदिवासी छात्र-युवाओं के साथ संवाद को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाएंगी।
राहुल गांधी के अभियान से जोड़ा गया प्रयास
अखिल भारतीय आदिवासी कांग्रेस ने इस पहल को ‘छात्रों की गूंज’ अभियान और युवाओं की सामाजिक एवं राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की दिशा में उठाया गया कदम बताया है।संगठन के अनुसार, युवाओं को केवल अपनी समस्याएं रखने तक सीमित न रखते हुए उन्हें सामाजिक भागीदारी और राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया से जोड़ने पर भी जोर दिया जाएगा।
प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों का मिलेगा सहयोग
अभियान को देशभर में संचालित करने के लिए अखिल भारतीय आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय समन्वयकों और संबंधित राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों का सहयोग लिया जाएगा। इससे अलग-अलग राज्यों में मौजूद आदिवासी छात्र संगठनों और युवाओं तक पहुंच बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। समिति स्थानीय स्तर पर सामने आने वाले मुद्दों को भी एकत्र करेगी।
जिम्मेदारी मिलने पर आशिका कुजूर ने जताया आभार
राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी मिलने के बाद आशिका कुजूर ने संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया सहित शीर्ष नेतृत्व के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि उनके लिए यह जिम्मेदारी महज संगठनात्मक पद नहीं है, बल्कि देशभर के आदिवासी छात्र-युवाओं की बात सुनने और उनके मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का अवसर है। आशिका कुजूर ने भरोसा जताया कि सभी राज्यों के साथियों और युवाओं के सहयोग से अभियान को व्यापक स्तर तक पहुंचाया जाएगा।
‘हर आदिवासी छात्र तक पहुंचने का प्रयास’
आशिका कुजूर ने कहा कि अभियान का उद्देश्य देश के हर आदिवासी छात्र तक पहुंचना और उसकी आवाज को सामने लाना है। उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं से सीधे बातचीत के जरिए उनकी वास्तविक समस्याओं को समझने की कोशिश की जाएगी।उन्होंने आदिवासी छात्र-छात्राओं और युवाओं से अभियान के साथ जुड़ने की अपील भी की। उनका कहना है कि युवाओं की भागीदारी से उनकी आवाज को एक मजबूत मंच मिल सकता है।
शिक्षा और भविष्य से जुड़े मुद्दों पर रहेगा जोर
अभियान के दौरान आदिवासी युवाओं से शिक्षा, रोजगार, सामाजिक भागीदारी और उनके भविष्य से जुड़े विषयों पर चर्चा की जाएगी। समिति का प्रयास रहेगा कि जमीनी स्तर पर सामने आने वाले मुद्दों को संगठन के राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया जाए। आशिका कुजूर को मिली यह जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि जशपुर की एक युवा जनप्रतिनिधि को देशभर के आदिवासी छात्र-युवाओं से जुड़े अभियान की कमान सौंपी गई है।