MP Doctors FIR: मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में फर्जीवाड़े का एक ऐसा खौफनाक खेल उजागर हुआ है, जिसने सरकारी चयन प्रक्रिया और जनता की सेहत, दोनों को दांव पर लगा दिया था। भोपाल के चूनाभट्टी थाने में एनएचएम विभाग की शिकायत पर ऐसे 9 कथित डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, जो फर्जी एमबीबीएस की डिग्रियां लगाकर पिछले लंबे समय से प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में अपनी सेवाएं दे रहे थे। पुलिस के मुताबिक, इस बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश होने के बाद अब इन सभी तथाकथित डॉक्टरों की गिरफ्तारी की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है।
इंटरव्यू का शॉर्टकट, सरकारी खजाने को चपत
इस पूरे रैकेट और जालसाजी की कार्यप्रणाली को लेकर चौंकाने वाली कड़ियां सामने आई हैं। शुरूआती जांच के अनुसार, इन सभी आरोपियों ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत निकलने वाली भर्तियों में हिस्सा लिया था। इन्होंने चयन समिति के सामने एमबीबीएस पास होने के जाली प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए और वॉक-इन-इंटरव्यू के माध्यम से संविदा डॉक्टर की सरकारी नौकरी हासिल कर ली। नौकरी पाने के बाद ये मुन्नाभाई प्रदेश के अलग-अलग जिलों और दूरदराज के क्षेत्रों में स्थित सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में बाकायदा तैनात थे और सरकारी खजाने से वेतन भी उठा रहे थे।
इन 9 फर्जी डॉक्टरों पर हुई FIR
डॉ. आकाश चंदेलकर
डॉ. मोहरसिंह
डॉ. कमलकिशोर
डॉ. मोनिका
डॉ. हारूण
डॉ. शांति
डॉ. सोनम
डॉ. बुद्धमान
डॉ. पवन
चूनाभट्टी पुलिस का बड़ा बयान
मामले में चूनाभट्टी थाना पुलिस ने जांच के दायरे को बढ़ा दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि विभाग की लिखित शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है। फिलहाल उन सभी विश्वविद्यालयों और मेडिकल कॉलेजों के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं, जहां की डिग्रियां इन आरोपियों ने जमा की थीं। जैसे ही दस्तावेजों की टेक्निकल और फॉरेंसिक रिपोर्ट फाइल में शामिल होगी, पुलिस की टीमें दबिश देकर इन सभी 9 डॉक्टरों को सलाखों के पीछे भेजेगी।