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अफ्रीका में मिली 7 लाख साल पुरानी इंसान की हड्डियां: पलटकर रख दी वैज्ञानिकों की थ्योरी...

अफ्रीका में मिली 7 लाख साल पुरानी इंसान की हड्डियां: पलटकर रख दी वैज्ञानिकों की थ्योरी...

रबात। इंसान की शुरुआत कहां से हुई? वैज्ञानिक सालों से इस सवाल का जवाब ढूंढ रहे हैं। अब मोरक्को में मिली करीब 7.7 लाख साल पुरानी हड्डियों ने एक ऐसा राज खोला है, जिसने मानव इतिहास को ही बदल दिया है। मोरक्को के कैसाब्लांका शहर के पास वैज्ञानिकों को इंसानों के बहुत पुराने अवशेष मिले हैं। ये अवशेष करीब 7,73,000 साल पुराने हैं। यह खोज हमें हमारे पूर्वजों के बारे में कई नई बातें बताती है। यह खोज उस समय की है जब इंसान की अलग-अलग प्रजातियां जैसे निएंडरथल और डेनिसोवन एक-दूसरे से अलग होकर अपनी पहचान बना रही थीं।

इंसानों के कॉमन पूर्वज की खोज:

वैज्ञानिकों का मानना है कि आज के इंसान (होमो सेपियन्स), निएंडरथल और डेनिसोवन, ये तीनों लाखों साल पहले एक ही पूर्वज की संतान थे। आज से करीब 55 लाख से 7.6 लाख साल पहले ये तीनों एक-दूसरे से अलग होकर अपनी-अपनी प्रजाति बन गए। लेकिन, सबसे बड़ा सवाल यह है कि वह कॉमन पूर्वज कौन था और कहां रहता था। हालांकि यह अभी भी रहस्य बना हुआ है।

क्या थी वैज्ञानिकों की पुरानी थ्योरी:

पहले वैज्ञानिकों को लगा कि स्पेन की एक गुफा में रहने वाला होमो एंटेसेसर ही वह पूर्वज है। यह प्रजाति 8 लाख साल पहले रहती थी और इसमें पराने और नए दोनों तरह के इंसानों की झलक मिलती थी। अगर स्पेन वाली बात सच होती तो इसका मतलब यह होता कि इंसानों की इन तीनों प्रजातियों का बंटवारा यूरोप (यूरेशिया) में हुआ था न कि अफ्रीका में

क्या मिल गया इतिहास का लापता पन्ना:

वैज्ञानिकों ने सामने समस्या थी कि उन्हें अफ्रीका में 10 लाख साल पहले के और 6 लाख साल पहले के इंसानों के सबूत मिल तो रहे थे, लेकिन इनके बीच के समय का कुछ पता नहीं था। प्रोफेसर जीन-जैक्स हबलिन का कहना है कि पहले अफ्रीका में इस समय के अवशेष नहीं मिल रहे थे, इसलिए हमें लगा कि वहां कोई नहीं रहता था। मोरक्को की एक जगह पर जबड़े की हड्डियां, दांत और रीढ़ की हड्डी मिले हैं।

इस खोज से क्या साबित होता है:

इस बदलाव ने दुनिया भर की चट्टानों पर एक खास निशान छोड़ दिया था जिससे वैज्ञानिकों को इनकी उम्र का पक्का यकीन हो गया और यह भी कि इंसानों का जन्म अफ्रीका में हुआ था। इस खोज को करने वाले प्रोफेसर हबलिन अभी इसे कोई बिल्कुल नई प्रजाति नहीं कह रहे हैं।


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