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महाराष्ट्र में 'ऑपरेशन टाइगर' की आहट! उद्धव गुट के 6 सांसद दिल्ली पहुंचे, शिंदे गुट में शामिल होने की अटकलें तेज

महाराष्ट्र में 'ऑपरेशन टाइगर' की आहट! उद्धव गुट के 6 सांसद दिल्ली पहुंचे, शिंदे गुट में शामिल होने की अटकलें तेज

नई दिल्ली/मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। शिवसेना (UBT) में एक बार फिर बड़ी टूट की आशंका गहरा गई है। सूत्रों के मुताबिक, उद्धव ठाकरे गुट के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसद बुधवार (17 जून) को दिल्ली पहुंच चुके हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि ये बागी सांसद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात कर सकते हैं और लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र सौंपकर अलग गुट बनाने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।इस बीच, शिवसेना (UBT) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने सोशल मीडिया पर 'मनी पावर' का आरोप लगाकर सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।

संजय राउत का बड़ा आरोप: "अपना सपना मनी-मनी, 15 करोड़ का ऑफर"

सोमवार से दिल्ली में डेरा डाले हुए संजय राउत ने 'एक्स' (ट्विटर) पर पोस्ट कर सत्तारूढ़ गठबंधन पर करारा हमला बोला। उन्होंने लिखा:"अपना सपना मनी मनी! यह चौंकाने वाला और घिनौना है कि महाराष्ट्र के सांसदों को पाला बदलने के लिए आज रात 15 करोड़ रुपये प्रत्येक को ऑफर किए जा रहे हैं।"हालांकि, इससे पहले राउत ने इन खबरों को अफवाह बताते हुए कहा था कि हमारा कैडर-बेस्ड दल है और किसी के अलग गुट बनाने की जानकारी सच नहीं है।

किस सांसद को क्या मिला ऑफर? (अटकलों का बाजार गर्म)

राजनीतिक गलियारों और मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि बागी सांसदों को लुभाने के लिए भारी-भरकम ऑफर दिए गए हैं:

संजय जाधव (परभनी सांसद): केंद्र में मंत्री पद और क्षेत्र के विकास के लिए भारी फंडिंग का आश्वासन।

नागेश पाटील अष्टीकर (हिंगोली सांसद): क्षेत्र विकास फंड और आगामी 2029 के लोकसभा चुनाव में टिकट का वादा।

भाऊसाहेब वाकचौरे (शिरडी सांसद): ठाकरे गुट में भविष्य न दिखने के कारण शिंदे गुट में शामिल होने का मन बना चुके हैं।

ओमराजे निंबालकर: उद्धव ठाकरे के बेहद करीबी माने जाने वाले निंबालकर भी मंगलवार शाम से दिल्ली में मौजूद हैं, जिससे सस्पेंस बढ़ गया है।

क्या है शिंदे गुट का 'ऑपरेशन टाइगर'?

सत्तारूढ़ एकनाथ शिंदे गुट के नेताओं ने इन दावों की पुष्टि कर दी है। शिंदे गुट के एमएलसी (MLC) कृपाल तुमाने ने इस सियासी हलचल की तुलना एक मेडिकल सर्जरी से करते हुए कहा:"जैसे किसी मरीज के ऑपरेशन से पहले जांच की जाती है, ठीक उसी तरह 'ऑपरेशन टाइगर' के तहत बातचीत अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। उद्धव गुट के 7 सांसद और 16 विधायक हमारे संपर्क में हैं। मानसून सत्र शुरू होने से पहले यह पूरा ऑपरेशन पूरा कर लिया जाएगा।" वहीं, शिंदे सरकार में मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा कि शिवसेना के दरवाजे सांसदों, विधायकों और कार्यकर्ताओं के लिए 24 घंटे खुले हैं। अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, इन सांसदों को उनके निर्वाचन क्षेत्रों में बड़े ठेके और काम देने का भी भरोसा दिया गया है।

उद्धव ठाकरे का दोटूक: "जाना है तो जाएं, बाद में पछताएंगे"

इस पूरे घटनाक्रम पर उद्धव ठाकरे का रुख भी सामने आया है। खबरों के अनुसार, उद्धव ने साफ कर दिया है कि वे किसी को जबरदस्ती पार्टी में नहीं रोकेंगे। उन्होंने कहा कि जिन्हें जाना है वे जाने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन बालासाहेब की शिवसेना छोड़ने वालों को बाद में पछताना पड़ेगा।

दलबदल विरोधी कानून और 'सिक्स' का गणित

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, दलबदल विरोधी कानून (Anti-defection Law) के तहत अयोग्यता से बचने के लिए उद्धव गुट के कुल 9 सांसदों में से कम से कम दो -तिहाई (यानि 6 सांसदों) का एक साथ टूटना जरूरी है। अगर 6 सांसद एक साथ अलग होते हैं, तो उनकी संसद सदस्यता बची रहेगी।पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बगावत की खबरों के बाद, अब महाराष्ट्र की इस बड़ी हलचल ने विपक्षी गठबंधन (INDIA ब्लॉक) की चिंताएं बढ़ा दी हैं।


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