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Ken-Betwa Project: केन-बेतवा प्रोजेक्ट पर 'महा-संग्राम' भड़के आदिवासी, प्रशासन को खदेड़ा

Ken-Betwa Project: केन-बेतवा प्रोजेक्ट पर 'महा-संग्राम' भड़के आदिवासी, प्रशासन को खदेड़ा

Ken-Betwa Project: मध्य प्रदेश की महत्वाकांक्षी केन-बेतवा लिंक परियोजना अब मुआवजे के विवाद और भारी जनाक्रोश की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। छतरपुर में अपनी जमीन और हक की लड़ाई लड़ रहे आदिवासियों का 'चिता आंदोलन' आज उस वक्त रणक्षेत्र में तब्दील हो गया, जब प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को जबरन हटाने और उनके राशन-पानी पर रोक लगाने की कोशिश की। उग्र हुई हजारों की भीड़ के सामने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को जान बचाकर मौके से भागना पड़ा।

भड़का आदिवासियों का गुस्सा

केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित आदिवासी और किसान लंबे समय से मुआवजे में हो रही धांधली और विसंगतियों के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से 'चिता आंदोलन' कर रहे हैं। आज प्रशासन की टीम भारी पुलिस बल के साथ आंदोलन स्थल पर पहुँची। आरोप है कि टीम ने ग्रामीणों को वहां से खदेड़ने का प्रयास किया और उनके खाने-पीने की सामग्री को रोक दिया। जैसे ही राशन रोकने की खबर फैली, हजारों की संख्या में मौजूद आदिवासी महिलाएं और पुरुष डंडे लेकर सड़क पर उतर आए। आक्रोशित भीड़ ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

पैदल और गाड़ियों से भागे अफसर

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस कदर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। उग्र भीड़ को अपनी ओर बढ़ता देख पुलिसकर्मी और प्रशासनिक अधिकारी अपनी गाड़ियां छोड़कर पैदल और जीपों से भागते नजर आए। ग्रामीणों के कड़े विरोध के बाद फिलहाल प्रशासन मौके से पूरी तरह पीछे हट गया है, लेकिन इलाके में भारी तनाव की स्थिति बनी हुई है।

तो अंजाम बुरा होगा...

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने प्रशासन को दो टूक चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि आदिवासियों और किसानों के हक की यह लड़ाई अब एक बड़े जन आंदोलन का रूप ले चुकी है। यदि प्रशासन ने उनके लोकतांत्रिक अधिकार को दबाने या भूखा मारने की कोशिश की, तो आने वाले समय में हालात और अधिक बेकाबू हो सकते हैं।

क्या है केन-बेतवा परियोजना का विवाद?

दरअसल, इस परियोजना के कारण कई गांवों की जमीन अधिग्रहित की जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि मुआवजे के वितरण में भारी भेदभाव और भ्रष्टाचार हुआ है। पात्र किसानों को उचित राशि नहीं मिल रही है, जिससे वे अपनी पुश्तैनी जमीन छोड़ने को तैयार नहीं हैं।


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