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रायगढ़ में बढ़ेगा देशभक्ति का गौरव, सिंदूर पार्क में स्थापित होगा 1971 युद्ध का ऐतिहासिक टी-55 टैंक

रायगढ़ में बढ़ेगा देशभक्ति का गौरव, सिंदूर पार्क में स्थापित होगा 1971 युद्ध का ऐतिहासिक टी-55 टैंक

रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ शहर को भारतीय सेना की गौरवशाली विरासत से जुड़ी एक ऐतिहासिक वॉर ट्रॉफी मिली है। वर्ष 1971 के भारत-पाक युद्ध में अपनी बहादुरी का परिचय देने वाला सेवामुक्त टी-55 युद्धक टैंक अब रायगढ़ की पहचान बनने जा रहा है। वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक ओपी चौधरी की पहल और जिला प्रशासन के समन्वय से यह सैन्य धरोहर शहर पहुंची है। जल्द ही इसे सिंदूर पार्क में पूरे सम्मान के साथ स्थापित किया जाएगा।

फिलहाल कलेक्ट्रेट परिसर में रखा गया टैंक

सोमवार को रायगढ़ पहुंचते ही ऐतिहासिक टी-55 टैंक को देखने के लिए लोगों में खासा उत्साह दिखाई दिया। फिलहाल इसे सुरक्षा व्यवस्था के तहत कलेक्ट्रेट परिसर में रखा गया है। प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसे सिंदूर पार्क में स्थापित किया जाएगा, जहां यह आने वाली पीढ़ियों को भारतीय सेना के शौर्य और बलिदान की प्रेरणा देगा।

सिंदूर पार्क बनेगा देशभक्ति और पर्यटन का नया केंद्र

अब तक हरियाली और पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रसिद्ध सिंदूर पार्क को इस ऐतिहासिक टैंक की स्थापना के बाद नई पहचान मिलेगी। पार्क में आने वाले लोग प्रकृति के साथ-साथ भारतीय सेना के गौरवशाली इतिहास को भी करीब से जान सकेंगे। माना जा रहा है कि यह स्थान भविष्य में स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनेगा।

1971 के युद्ध में निभाई थी अहम भूमिका

टी-55 भारतीय सेना के सबसे भरोसेमंद युद्धक टैंकों में गिना जाता है। वर्ष 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान इस टैंक ने पश्चिमी और पूर्वी दोनों मोर्चों पर निर्णायक भूमिका निभाई थी। इसकी 100 मिमी की शक्तिशाली तोपों ने दुश्मन के बंकरों और टैंकों को ध्वस्त करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वहीं माइन ट्रॉल तकनीक की मदद से बारूदी सुरंगों वाले क्षेत्रों में सेना के लिए सुरक्षित रास्ते भी तैयार किए गए।

38 वर्षों तक देश की सेवा

1971 युद्ध के बाद भी टी-55 टैंक भारतीय सेना के कई अहम सैन्य अभियानों का हिस्सा रहा। ऑपरेशन रक्षक, ऑपरेशन विजय और ऑपरेशन पराक्रम जैसे अभियानों में इसने अपनी उपयोगिता साबित की। करीब 38 वर्षों तक सेना की सेवा देने के बाद वर्ष 2009 में इसे चरणबद्ध तरीके से सेवामुक्त कर दिया गया।

युवाओं के लिए बनेगा प्रेरणा का केंद्र

सिंदूर पार्क में स्थापित होने के बाद यह युद्धक टैंक केवल एक सैन्य स्मारक नहीं रहेगा, बल्कि देशभक्ति, अनुशासन और बलिदान की भावना को मजबूत करने वाला प्रेरणा स्थल बनेगा। यहां आने वाले बच्चे और युवा भारतीय सेना के इतिहास और वीर सैनिकों के साहस से परिचित हो सकेंगे। यह पहल रायगढ़ को सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और पर्यटन की दृष्टि से भी नई पहचान दिलाएगी। रायगढ़ को 1971 भारत-पाक युद्ध में इस्तेमाल हुआ ऐतिहासिक टी-55 युद्धक टैंक वॉर ट्रॉफी के रूप में मिला है। ओपी चौधरी की पहल से सिंदूर पार्क में स्थापित होने वाला यह टैंक शौर्य, बलिदान और देशभक्ति का नया प्रतीक बनेगा।


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