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SpaceX का Starship बना ऑर्बिटल रॉकेट, 26 Starlink V3 सैटेलाइट की सफल तैनाती

SpaceX का Starship बना ऑर्बिटल रॉकेट, 26 Starlink V3 सैटेलाइट की सफल तैनाती

नई दिल्ली। SpaceX के Starship कार्यक्रम ने एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि हासिल की है। कंपनी की Starship Flight 14 ने पहली बार पृथ्वी की कक्षा यानी ऑर्बिट तक पहुंचकर मिशन के सबसे अहम लक्ष्य को पूरा किया। यह उड़ान SpaceX के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे Starship को भविष्य में पूरी तरह और तेजी से दोबारा इस्तेमाल किए जाने वाले अंतरिक्ष परिवहन सिस्टम के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ा है। मिशन के दौरान Starship ने 26 नई पीढ़ी के Starlink V3 सैटेलाइट भी लो अर्थ ऑर्बिट में पहुंचाए। यह Starlink V3 सैटेलाइट्स की कक्षा में पहली operational deployment थी। इनमें से तीन सैटेलाइट्स पर विशेष कैमरे लगाए गए थे, जिनका इस्तेमाल Starship के हीटशील्ड की जांच के लिए किया जाना था।

पहली बार ऑर्बिटल मिशन में पहुंचा Starship

इससे पहले Starship की उड़ानें मुख्य रूप से suborbital trajectories पर आधारित थीं। Flight 14 को पहली बार पृथ्वी की कक्षा में प्रवेश करने के उद्देश्य से तैयार किया गया था। SpaceX की योजना के अनुसार Starship को लगभग 275 किलोमीटर की ऊंचाई पर पहुंचना था और इसके बाद कई बार पृथ्वी की परिक्रमा करते हुए मिशन के अगले चरणों को पूरा करना था। मिशन के दौरान Starship ने orbital insertion burn पूरा किया। इसके बाद पेलोड डिप्लॉयमेंट की प्रक्रिया शुरू हुई और 26 Starlink V3 satellites को अंतरिक्ष में तैनात किया गया।

26 Starlink V3 सैटेलाइट बने मिशन की खास उपलब्धि

Flight 14 सिर्फ Starship को ऑर्बिट तक पहुंचाने वाला परीक्षण नहीं था। इस मिशन के जरिए SpaceX ने अपनी अगली पीढ़ी के Starlink नेटवर्क के लिए V3 satellites की तैनाती भी शुरू की। SpaceX के अनुसार इन V3 satellites को नेटवर्क की क्षमता और इंटरनेट स्पीड बढ़ाने के लिए विकसित किया गया है। कंपनी के मिशन विवरण में प्रत्येक V3 satellite के लिए लगभग 1 Tbps क्षमता का उल्लेख किया गया है। 26 satellites के साथ इस उड़ान से संभावित रूप से 26 Tbps क्षमता जोड़ी जा सकती है।

Super Heavy बूस्टर का क्या हुआ?

Starship को अंतरिक्ष की ओर भेजने वाला Super Heavy booster मिशन के बाद वापस लौटा। इस उड़ान में बूस्टर के लिए समुद्र में landing का परीक्षण किया गया था, जबकि tower catch जैसी recovery कोशिश इस मिशन का हिस्सा नहीं थी। SpaceX ने Flight 14 के लिए booster के launch, ascent, stage separation, boostback और offshore landing burn को प्रमुख परीक्षण उद्देश्यों में रखा था। इसलिए Super Heavy का समुद्र में hard splashdown होना Starship के orbital achievement को अलग से देखने वाली घटना है। इस मिशन का मुख्य ऐतिहासिक लक्ष्य Starship upper stage को पहली बार पृथ्वी की कक्षा तक पहुंचाना और वहां payload deployment करना था।

इंजन में समस्या के बावजूद जारी रही उड़ान

Starship कार्यक्रम की पिछली उड़ानों में भी SpaceX ने engine-out capability को परीक्षण का हिस्सा बनाया है। Flight 12 के दौरान एक Raptor engine बंद होने के बावजूद Starship ने अपनी निर्धारित trajectory हासिल की थी। Flight 14 में भी इंजन संबंधी चुनौती के बावजूद मिशन ने अपने महत्वपूर्ण orbital objectives पूरे किए। यह SpaceX के लिए इसलिए अहम है क्योंकि भविष्य के operational missions में रॉकेट को एक इंजन की समस्या जैसी परिस्थितियों के बीच भी सुरक्षित रूप से मिशन जारी रखने की क्षमता विकसित करनी होगी।

Starship ने ऑर्बिट के बाद क्या किया?

ऑर्बिट में पहुंचने और satellites deploy करने के बाद Starship को अपने मिशन के अगले चरण पूरे करने थे। SpaceX के आधिकारिक flight plan में deorbit burn, atmospheric reentry और Pacific Ocean में splashdown शामिल था। इस प्रक्रिया में spacecraft को पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश करना पड़ता है, जहां heatshield पर अत्यधिक तापीय दबाव पड़ता है। इसी कारण Flight 14 के दौरान heatshield से जुड़ी तकनीकों और नए डिजाइन बदलावों से भी डेटा जुटाया गया।

NASA के लिए भी क्यों अहम है Starship?

Starship का विकास केवल commercial satellite launches तक सीमित नहीं है। यह सिस्टम भविष्य के deep-space missions के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। NASA ने अपने Artemis कार्यक्रम के तहत चंद्रमा पर अंतरिक्ष यात्रियों को उतारने के लिए Starship के एक संस्करण को Human Landing System के रूप में चुना है। इसलिए Starship को लंबे समय तक विश्वसनीय तरीके से लॉन्च, orbital operations, refueling और सुरक्षित वापसी जैसी क्षमताएं प्रदर्शित करनी होंगी। Flight 14 का orbital milestone इस लंबे विकासक्रम का एक महत्वपूर्ण परीक्षण है।

आगे क्या है SpaceX का लक्ष्य?

SpaceX का दीर्घकालिक लक्ष्य Starship को एक ऐसे reusable transportation system के रूप में विकसित करना है, जिसका इस्तेमाल पृथ्वी की कक्षा से लेकर चंद्रमा और भविष्य में मंगल जैसे गहरे अंतरिक्ष अभियानों तक किया जा सके। हालांकि अभी Starship कार्यक्रम को पूरी तरह operational और rapidly reusable system बनने से पहले कई तकनीकी परीक्षणों से गुजरना होगा। इनमें orbital refueling, लंबे समय तक propellant management, heatshield durability और reliable recovery जैसी क्षमताएं शामिल हैं।
 


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