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एक विधायक के वोट की कितनी होती है वैल्यू? जानिए राष्ट्रपति चुनाव में भाजपा को कैसे मिला बड़ा फायदा...

एक विधायक के वोट की कितनी होती है वैल्यू? जानिए राष्ट्रपति चुनाव में भाजपा को कैसे मिला बड़ा फायदा...

Presidential Election: साल 2027 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव को लेकर राजनीतिक हलकों में अभी से चर्चा तेज हो गई है। 2024 के लोकसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत से दूर रहने वाली भारतीय जनता पार्टी अब विधानसभा चुनावों में शानदार प्रदर्शन के दम पर मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है। पश्चिम बंगाल, बिहार और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों में एनडीए की बढ़ती ताकत ने राष्ट्रपति चुनाव का पूरा समीकरण बदल दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हालिया विधानसभा नतीजों ने भाजपा को न केवल संख्या बल दिया है, बल्कि सहयोगी दलों के बीच उसकी स्थिति भी पहले से अधिक मजबूत कर दी है।

2024 लोकसभा चुनाव के नुकसान की भरपाई

लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा की सीटें 303 से घटकर 240 पर आ गई थीं। इसके बाद माना जा रहा था कि राष्ट्रपति चुनाव में पार्टी को सहयोगी दलों पर अधिक निर्भर रहना पड़ेगा। विपक्ष ने भी दावा किया था कि NDA के भीतर भाजपा की पकड़ कमजोर हो सकती है। हालांकि, इसके बाद हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा और एनडीए ने कई राज्यों में बड़ी सफलता हासिल की। विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में भाजपा की विधायकों की संख्या में बड़ा इजाफा हुआ। इसके अलावा बिहार और महाराष्ट्र में भी NDA ने मजबूत पकड़ बनाई। इन राज्यों में बढ़े विधायकों की संख्या ने राष्ट्रपति चुनाव के निर्वाचक मंडल में भाजपा की स्थिति को काफी मजबूत कर दिया है।

राष्ट्रपति चुनाव में कैसे तय होती है वोट की वैल्यू?

भारत के राष्ट्रपति का चुनाव आम जनता सीधे नहीं करती। इसके लिए एक निर्वाचक मंडल बनाया जाता है, जिसमें लोकसभा और राज्यसभा के निर्वाचित सांसद, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के निर्वाचित विधायक  शामिल होते हैं, राष्ट्रपति चुनाव में हर विधायक के वोट की वैल्यू समान नहीं होती। यह संबंधित राज्य की जनसंख्या के आधार पर तय होती है। इसके लिए 1971 की जनगणना के आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाता है।

विधायक के वोट की वैल्यू का फॉर्मूला

राज्य की कुल जनसंख्या ÷ कुल निर्वाचित विधायक ÷ 1000
इसी आधार पर बड़े राज्यों के विधायकों की वोट वैल्यू अधिक होती है।

यूपी और बंगाल क्यों हैं सबसे अहम?

उत्तर प्रदेश राष्ट्रपति चुनाव में सबसे अहम राज्य माना जाता है। यहां एक विधायक के वोट की वैल्यू 208 है, जो देश में सबसे अधिक है। यही वजह है कि यूपी विधानसभा में मजबूत पकड़ किसी भी दल को राष्ट्रपति चुनाव में बड़ा फायदा देती है। पश्चिम बंगाल, बिहार और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों में भी विधायकों की वोट वैल्यू काफी अधिक है। इन राज्यों में भाजपा और NDA की मजबूत स्थिति ने विपक्ष की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

सहयोगियों के बीच भाजपा की बढ़ी ताकत

हालिया विधानसभा चुनावों के बाद भाजपा अब सहयोगी दलों के मुकाबले अधिक मजबूत स्थिति में नजर आ रही है। महाराष्ट्र और बिहार में NDA के पास बड़ी संख्या में विधायक हैं, जिससे राष्ट्रपति चुनाव में उसका पलड़ा भारी दिखाई दे रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अब भाजपा राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के चयन में पहले की तुलना में अधिक निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

जुलाई 2027 में होगा राष्ट्रपति चुनाव

देश का अगला राष्ट्रपति चुनाव जुलाई 2027 में प्रस्तावित है। इससे पहले सभी दल अपने-अपने राजनीतिक समीकरण मजबूत करने में जुट गए हैं। हालांकि विपक्ष साझा उम्मीदवार उतारने की रणनीति बना सकता है, लेकिन मौजूदा आंकड़ों को देखते हुए NDA की स्थिति काफी मजबूत मानी जा रही है। बड़े राज्यों में भाजपा की बढ़ती ताकत ने राष्ट्रपति चुनाव को लेकर उसकी राह काफी आसान कर दी है।

राजनीतिक तस्वीर कमजोर 

2024 के लोकसभा चुनाव के बाद जो राजनीतिक तस्वीर कमजोर दिखाई दे रही थी, वह अब विधानसभा चुनावों के बाद पूरी तरह बदल चुकी है। पश्चिम बंगाल, बिहार और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में NDA की मजबूती ने 2027 के राष्ट्रपति चुनाव में भाजपा को निर्णायक बढ़त दिला दी है। ऐसे में आने वाले समय में राष्ट्रपति चुनाव का मुकाबला विपक्ष के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।


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