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Iran-US Talks: पाकिस्तान की जगह कतर की एंट्री, युद्धविराम और तेल सप्लाई पर बन सकती है बड़ी डील...

Iran-US Talks: पाकिस्तान की जगह कतर की एंट्री, युद्धविराम और तेल सप्लाई पर बन सकती है बड़ी डील...

Iran-US Talks: कतर की राजधानी दोहा में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही अहम वार्ता अब बड़े समझौते की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। क्षेत्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनने लगी है। इससे पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव कम होने और दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सामान्य गतिविधियां बहाल होने की उम्मीद बढ़ गई है।बताया जा रहा है कि इस पूरी बातचीत में अब कतर मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, जबकि पहले पाकिस्तान और तुर्की इस जिम्मेदारी को संभाल रहे थे। यही वजह है कि पाकिस्तान, जो इस बातचीत का श्रेय लेने की कोशिश में था, अब पूरी प्रक्रिया से लगभग बाहर होता नजर आ रहा है।

किन मुद्दों पर हो रही है बातचीत?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोहा में जारी वार्ता में कई बड़े मुद्दों पर चर्चा हो रही है। इनमें 60 दिन के संभावित युद्धविराम, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही बहाल करने, ईरानी तेल निर्यात पर ढील देने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर आगे की बातचीत शामिल है। इसके अलावा खाड़ी क्षेत्र में बिछाई गई समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाने और व्यापारिक जहाजों से किसी तरह का अतिरिक्त शुल्क नहीं लेने पर भी चर्चा हुई है। अगर बातचीत सफल रहती है, तो अगले 30 दिनों में समुद्री व्यापार फिर से सामान्य स्थिति में लौट सकता है।

12 अरब डॉलर की फ्रीज संपत्तियों पर अटका मामला

इस वार्ता का सबसे बड़ा विवाद ईरान की विदेशों में फ्रीज की गई संपत्तियां बनी हुई हैं। ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक शुरुआती चरण में उसकी कुछ रकम जारी नहीं की जाती, तब तक किसी अंतिम समझौते पर सहमति संभव नहीं होगी। सूत्रों के मुताबिक, तेहरान ने शुरुआती चरण में कम से कम 12 अरब डॉलर तक पहुंच की मांग रखी है। दूसरी ओर अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने समृद्ध यूरेनियम कार्यक्रम पर सख्त प्रतिबद्धता दे।

ट्रंप का बड़ा बयान

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा है कि ईरान के समृद्ध यूरेनियम को या तो नष्ट किया जाएगा या फिर अंतरराष्ट्रीय निगरानी में खत्म कराया जाएगा। अमेरिका का दावा है कि ईरान इस पर सहमत हो गया है, लेकिन ईरान ने अभी तक किसी अंतिम कमिटमेंट से इनकार किया है। ईरान का कहना है कि परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेगी और किसी भी समझौते के लिए पहले आर्थिक प्रतिबंधों में राहत जरूरी होगी।

पाकिस्तान क्यों हुआ बाहर?

ईरान-अमेरिका वार्ता के शुरुआती दौर में पाकिस्तान और तुर्की मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे थे। पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में पहले दौर की बातचीत कराने की कोशिश भी की थी, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया। इसके बाद दूसरे दौर की बातचीत की कोशिश हुई, लेकिन दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी सामने आ गई। ईरान को संदेह था कि पाकिस्तान अमेरिका के पक्ष में बात कर रहा है, जबकि अमेरिका भी पाकिस्तान की भूमिका को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं था। यही वजह रही कि अब कतर ने इस बातचीत में सक्रिय भूमिका संभाल ली है और दोनों देशों को समझौते की शर्तों पर राजी कराने की कोशिश कर रहा है।

दुनिया की नजर दोहा वार्ता पर

हालांकि अभी तक अमेरिका और ईरान की ओर से किसी अंतिम समझौते की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन दोहा में जारी इस बातचीत पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। अगर यह डील सफल होती है, तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार, पश्चिम एशिया की राजनीति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर सीधे तौर पर पड़ सकता है।


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