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अमेरिका में ट्रंप के नए टैरिफ पर कानूनी लड़ाई तेज, 25 राज्यों ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

अमेरिका में ट्रंप के नए टैरिफ पर कानूनी लड़ाई तेज, 25 राज्यों ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

Trump Tariff Row: अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई टैरिफ नीति एक बार फिर बड़े राजनीतिक और कानूनी विवाद का कारण बन गई है। देश के 25 राज्यों ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ अदालत में याचिका दायर करते हुए आरोप लगाया है कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के पहले के फैसले की अनदेखी करते हुए नए आयात शुल्क लागू किए हैं। राज्यों का कहना है कि यह कदम अमेरिकी नागरिकों और कारोबारियों पर गैरकानूनी आर्थिक बोझ डालने जैसा है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद फिर लागू हुआ नया टैरिफ

ट्रंप प्रशासन का मानना है कि विदेशी वस्तुओं पर अधिक सीमा शुल्क लगाने से अमेरिकी उद्योग और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूती मिलेगी। इससे पहले सरकार ने आपातकालीन आर्थिक शक्तियों का इस्तेमाल कर कई देशों से आने वाले आयात पर टैरिफ लगाया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने उस फैसले पर रोक लगाते हुए आयातकों से वसूली गई राशि लौटाने का आदेश दिया था। इसके बाद अस्थायी टैरिफ की अवधि समाप्त होते ही प्रशासन ने 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत नई शुल्क व्यवस्था लागू कर दी।

भारत समेत लगभग 60 देशों पर नया आयात शुल्क

नई नीति के तहत भारत, यूरोपीय संघ और करीब 60 देशों से अमेरिका आने वाले उत्पादों पर 10% से 12.5% तक का नया टैरिफ लगाया गया है। बताया जा रहा है कि इसका असर अमेरिका के लगभग 99 प्रतिशत आयात पर पड़ सकता है।

25 राज्यों ने अदालत में दी चुनौती

नए टैरिफ के विरोध में 25 राज्यों ने इंटरनेशनल ट्रेड कोर्ट में याचिका दायर की है। राज्यों का तर्क है कि राष्ट्रपति को बिना कांग्रेस की स्पष्ट मंजूरी के व्यापक स्तर पर नए आयात शुल्क लगाने का संवैधानिक अधिकार नहीं है। न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स ने कहा कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बावजूद आम परिवारों और व्यापारिक संस्थानों पर अतिरिक्त टैक्स का बोझ डालने की कोशिश कर रही है।

व्हाइट हाउस ने किया फैसले का बचाव

विवाद के बीच व्हाइट हाउस ने सरकार की नीति को पूरी तरह कानूनी बताया है। प्रशासन का कहना है कि कई देश बंधुआ मजदूरी से तैयार उत्पादों के व्यापार को रोकने में विफल रहे हैं। ऐसे में अमेरिकी व्यापार, उद्योग और श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत यह कदम उठाना आवश्यक था।

वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है असर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह कानूनी विवाद लंबा खिंचता है तो अमेरिका के प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों के साथ व्यापारिक संबंध प्रभावित हो सकते हैं। भारत सहित कई देशों के निर्यातकों पर भी इसका असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।


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