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NEET-UG Re-Exam 2026: दिल्ली हाईकोर्ट ने टेलीग्राम बैन को दी मंजूरी, परीक्षा से पहले 5 दिन रहेगा प्रतिबंध

NEET-UG Re-Exam 2026: दिल्ली हाईकोर्ट ने टेलीग्राम बैन को दी मंजूरी, परीक्षा से पहले 5 दिन रहेगा प्रतिबंध

नई दिल्ली। NEET-UG Re-Exam 2026 से पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसके तहत मैसेजिंग प्लेटफॉर्म Telegram को परीक्षा अवधि के दौरान पांच दिनों के लिए अस्थायी रूप से ब्लॉक किया गया था। अदालत ने कहा कि परीक्षा की निष्पक्षता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम उचित, तर्कसंगत और कानूनी रूप से वैध है।

परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए जरूरी था प्रतिबंध

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस तेजस करिया ने कहा कि सरकार का निर्णय जल्दबाजी में नहीं लिया गया, बल्कि परीक्षा में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी, पेपर लीक और संगठित नकल को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया एक निवारक कदम था। अदालत ने माना कि परीक्षा जैसे संवेदनशील आयोजन में ऐसी कार्रवाई सार्वजनिक हित में की जा सकती है।

सरकार ने बताई बैन की वजह

केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि Telegram का इस्तेमाल कथित तौर पर कुछ संगठित नकल गिरोहों द्वारा किया जा रहा था। उन्होंने तर्क दिया कि लाखों छात्रों के भविष्य को देखते हुए परीक्षा की विश्वसनीयता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69A के तहत सभी निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करते हुए यह निर्णय लिया गया था। अदालत ने सरकार की इन दलीलों को स्वीकार कर लिया।

Telegram की याचिका खारिज

सुनवाई के दौरान Telegram की ओर से पूरे प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाने को अनुचित बताया गया। कंपनी का कहना था कि यदि कुछ समूहों या चैनलों में समस्या थी तो केवल उन्हीं पर कार्रवाई की जानी चाहिए थी। NEET-UG Re-Exam 2026 के मद्देनजर आया यह फैसला परीक्षा सुरक्षा को लेकर सरकार की सख्ती और न्यायपालिका के समर्थन को दर्शाता है। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि आईटी एक्ट के प्रावधानों के तहत किसी इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म को कार्रवाई से बाहर नहीं रखा जा सकता और विशेष परिस्थितियों में व्यापक प्रतिबंध भी लगाया जा सकता है।

केवल पांच दिनों का अस्थायी प्रतिबंध

अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि Telegram पर लगाया गया प्रतिबंध स्थायी नहीं है, बल्कि केवल पांच दिनों के लिए लागू किया गया है। ऐसे में इसे अत्यधिक कठोर या असंगत नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि संबंधित अधिकारियों ने सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद यह निर्णय लिया है और इसका उद्देश्य केवल परीक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित करना है।

छात्रों के हित को दी प्राथमिकता

दिल्ली हाईकोर्ट ने अंततः Telegram की याचिका को खारिज करते हुए केंद्र सरकार के फैसले को बरकरार रखा। अदालत ने कहा कि लाखों छात्रों के भविष्य और परीक्षा की पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए लिया गया यह कदम सार्वजनिक हित में है।


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