नई दिल्ली। भारतीय पैरा खेल जगत से दुखद खबर सामने आई है। एशियन पैरा गेम्स में तीन बार स्वर्ण पदक जीतने वाले पैरा जैवलिन थ्रोअर नीरज यादव अपने फ्लैट में मृत पाए गए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में किए गए पोस्टमार्टम में जहर सेवन की बात सामने आई है। हालांकि, उनकी मौत के पीछे की परिस्थितियों और कथित आत्महत्या के कारणों को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
नीरज यादव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए पैरा एथलेटिक्स में अपनी अलग पहचान बनाई थी। उन्होंने 2022 के एशियाई पैरा खेलों में पुरुषों की जैवलिन थ्रो F55 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था। उनके निधन की खबर से खेल जगत में शोक का माहौल है।
तीन बार एशियन पैरा गेम्स में जीता था गोल्ड
नीरज यादव भारत के प्रतिभाशाली पैरा जैवलिन थ्रो खिलाड़ियों में शामिल थे। उन्होंने एशियन पैरा गेम्स में लगातार तीन बार गोल्ड मेडल जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था। वर्ष 2022 में आयोजित एशियाई पैरा खेलों में भी उन्होंने F55 कैटेगरी में स्वर्ण पदक हासिल किया था।
उनकी उपलब्धियां शारीरिक चुनौतियों के बावजूद खेलों में आगे बढ़ने की प्रेरक मिसाल रही हैं। उनके निधन की खबर ने भारतीय पैरा एथलेटिक्स से जुड़े खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों को दुखी कर दिया है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जहर सेवन की बात
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में नीरज यादव का पोस्टमार्टम किया गया। रिपोर्ट में जहर सेवन की बात सामने आने का उल्लेख किया गया है। इस मामले में उनकी मौत की परिस्थितियों और इसके पीछे के कारणों को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।
भारत के चीफ पैरा एथलेटिक्स कोच एस. सत्यनारायण ने भी नीरज के निधन पर दुख जताया। उन्होंने बताया कि उन्हें जहर सेवन से मौत होने की जानकारी मिली थी। कोच ने इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना बताया।
डोपिंग मामले में लगा था चार साल का प्रतिबंध
नीरज यादव के करियर पर नवंबर 2023 में उस समय बड़ा असर पड़ा, जब डोपिंग नियमों के उल्लंघन का दोषी पाए जाने के बाद उन पर चार साल का प्रतिबंध लगाया गया। यह प्रतिबंध 2027 के अंतिम महीनों तक प्रभावी रहने की जानकारी दी गई है।
प्रतिबंध के कारण वह 2026 के एशियाई पैरा खेलों में हिस्सा नहीं ले सके। कोच एस. सत्यनारायण ने आशंका जताई कि प्रतिबंध के चलते नीरज मानसिक तनाव से गुजर रहे होंगे। हालांकि, उन्होंने इसे नीरज की मौत का प्रमाणित कारण नहीं बताया है। फिलहाल, उनके निधन के पीछे की वजह को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
सात साल की उम्र में पोलियो, फिर खेलों में बनाई पहचान
उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले नीरज यादव को सात साल की उम्र में पोलियो ने प्रभावित किया था, जिसके बाद उन्हें पैरालिसिस की समस्या हुई। इसके बावजूद उन्होंने खेलों से अपना जुड़ाव बनाए रखा और आगे बढ़ने का प्रयास जारी रखा।
नीरज ने वर्ष 2005 से 2012 तक व्हीलचेयर टेनिस खेला। इसके बाद उन्होंने पैरा एथलेटिक्स की ओर रुख किया और जैवलिन थ्रो में अपनी पहचान बनाई। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक जीतने तक का उनका सफर उनके खेल करियर का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
नीरज यादव के निधन से भारतीय पैरा एथलेटिक्स ने एक अनुभवी खिलाड़ी खो दिया है। उनकी मौत के कारणों और घटनाक्रम से जुड़े बाकी सवालों के जवाब संबंधित जांच और आधिकारिक जानकारी के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।