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भोपाल में अपराधियों पर कसेगा शिकंजा! गुप्त रूप से तैनात होंगे ‘माइक्रो बीट नागरिक प्रभारी’

भोपाल में अपराधियों पर कसेगा शिकंजा! गुप्त रूप से तैनात होंगे ‘माइक्रो बीट नागरिक प्रभारी’

भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में अपराध, नशाखोरी और असामाजिक गतिविधियों पर शिकंजा कसने के लिए पुलिसिंग व्यवस्था में नया प्रयोग शुरू होने जा रहा है। भोपाल पुलिस अब शहर के अलग-अलग इलाकों में भरोसेमंद नागरिकों को गोपनीय तरीके से ‘माइक्रो बीट नागरिक प्रभारी’ के रूप में जोड़ने की तैयारी कर रही है। ये नागरिक अपने इलाके में होने वाली संदिग्ध गतिविधियों और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों की जानकारी पुलिस तक पहुंचाएंगे। इस नई व्यवस्था का मकसद अपराध होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय अपराध की आशंका और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना पुलिस तक पहले पहुंचाना है। पुलिस का मानना है कि स्थानीय लोग अपने क्षेत्र की गतिविधियों से सबसे ज्यादा परिचित होते हैं, इसलिए उन्हें पुलिसिंग से जोड़ने पर सूचनाएं तेजी से मिल सकती हैं।

हर इलाके की गतिविधियों पर रहेगी नजर

माइक्रो बीट नागरिक प्रभारी अपने क्षेत्र में संदिग्ध लोगों की आवाजाही, नशाखोरी, अपराधियों की सक्रियता और असामाजिक गतिविधियों से जुड़ी जानकारी पुलिस को देंगे। इसके साथ ही ऐसे स्थानीय विवादों की सूचना भी दी जाएगी, जिनके बढ़ने पर भविष्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है। पुलिस के मुताबिक, नागरिकों से मिलने वाली स्थानीय स्तर की जानकारी संभावित अपराधों की पहचान करने और समय रहते कार्रवाई करने में मददगार साबित हो सकती है।

पुलिस की लापरवाही की भी होगी रिपोर्ट

नई माइक्रो बीट व्यवस्था की एक अहम विशेषता पुलिस की जवाबदेही से जुड़ी है। यदि नागरिक प्रभारी किसी संदिग्ध गतिविधि या घटना की जानकारी पुलिस को देता है और संबंधित बीट अधिकारी या पुलिसकर्मी की ओर से कार्रवाई में लापरवाही बरती जाती है, तो इसकी सूचना वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाई जा सकेगी। गंभीर मामलों में ऐसी रिपोर्ट पुलिस के शीर्ष अधिकारियों और पुलिस कमिश्नर तक भी पहुंच सकती है। इससे जमीनी स्तर पर पुलिस की कार्यप्रणाली की निगरानी मजबूत होने की उम्मीद है।

गोपनीय रहेगा नागरिक प्रभारियों का चयन

भोपाल पुलिस प्रत्येक माइक्रो बीट के लिए ऐसे नागरिकों का गोपनीय पैनल तैयार कर रही है, जिनकी छवि साफ-सुथरी हो और जो अपने क्षेत्र में सामाजिक रूप से सक्रिय एवं विश्वसनीय माने जाते हों। चयनित नागरिकों की पहचान सार्वजनिक नहीं की जाएगी। इसका उद्देश्य यह है कि वे बिना किसी दबाव या भय के अपने क्षेत्र से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी पुलिस तक पहुंचा सकें।

अपराध रोकने में माइक्रो बीट की अहम भूमिका

पुलिसिंग व्यवस्था में माइक्रो बीट को जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण इकाई माना जाता है। पुलिस का मानना है कि यदि किसी क्षेत्र से समय पर और विश्वसनीय सूचना मिल जाए तो संभावित अपराध को शुरुआती स्तर पर ही रोकने की कोशिश की जा सकती है। इस व्यवस्था से पुलिस को इलाके में सक्रिय अपराधियों, नशे से जुड़ी गतिविधियों और स्थानीय विवादों की स्थिति को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलने की उम्मीद है।

हर महीने होगी व्यवस्था की समीक्षा

भोपाल पुलिस इस पूरी व्यवस्था की नियमित निगरानी भी करेगी। नागरिक प्रभारियों से प्राप्त सूचनाओं, उन पर हुई पुलिस कार्रवाई और शिकायतों की मासिक स्तर पर उच्चाधिकारियों द्वारा समीक्षा की जाएगी। समीक्षा के दौरान यह भी देखा जाएगा कि सूचना मिलने के बाद पुलिस ने कितनी तेजी से कार्रवाई की और कहीं किसी स्तर पर लापरवाही तो नहीं हुई।

पुलिस का लक्ष्य

नई माइक्रो बीट व्यवस्था के जरिए भोपाल पुलिस अपराधियों पर निगरानी मजबूत करने के साथ-साथ आम नागरिकों को भी अपराध नियंत्रण की प्रक्रिया से जोड़ना चाहती है। पुलिस का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर सूचनाओं का नेटवर्क मजबूत कर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण और कानून-व्यवस्था को बेहतर बनाए रखना है।


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