सादिक अली, पचमढ़ी: पचमढ़ी क्षेत्र और पूरे मध्य प्रदेश के लिए यह गौरव का क्षण है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित 'युवा विज्ञानी कार्यक्रम' (YUVIKA-2026) यानी 'यंग साइंटिस्ट प्रोग्राम' में पचमढ़ी की एक होनहार बेटी ने अपनी प्रतिभा का परचम लहराया है। पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय, पचमढ़ी की छात्रा जयश्री कासोधन ने देश के इस सबसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिक कार्यक्रम में हिस्सा लेकर क्षेत्र का नाम रोशन किया है।
श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र में ली ट्रेनिंग
11 मई से 22 मई, 2026 तक चले इस दो सप्ताह के आवासीय कार्यक्रम में सफलतापूर्वक भाग लिया। यह विशेष प्रशिक्षण भारत के मुख्य अंतरिक्ष केंद्र, सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC SHAR), श्रीहरिकोटा में आयोजित किया गया था, जहाँ से भारत के बड़े-बड़े रॉकेट और सैटेलाइट लॉन्च किए जाते हैं। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम के समापन पर जयश्री को इसरो के वैज्ञानिक सचिव श्री एम. गणेश पिल्लई और इसरो के चेयरमैन व अंतरिक्ष विभाग के सचिव डॉ. वी. नारायणन के हस्ताक्षरों से युक्त सहभागिता प्रमाण पत्र व विशेष युविका बैच प्रदान किया गया।
क्या है इसरो का 'युविका' कार्यक्रम?
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) हर साल स्कूली बच्चों (मुख्य रूप से कक्षा 9वीं उत्तीर्ण छात्रों) के लिए इस विशेष कार्यक्रम को आयोजित करता है। इसका मुख्य उद्देश्य "कैच देम यंग" (Catch them young) है, यानी छोटी उम्र में ही बच्चों के भीतर छिपी वैज्ञानिक क्षमता को पहचानना और उसे निखारना।
क्या है बच्चों के फायदे?
स्पेस टेक्नोलॉजी और साइंस का व्यावहारिक ज्ञान: किताबी दुनिया से बाहर निकलकर बच्चों को स्पेस टेक्नोलॉजी, स्पेस साइंस और स्पेस एप्लीकेशंस (अंतरिक्ष अनुप्रयोगों) का व्यावहारिक ज्ञान मिलता है। छात्रों को असली प्रयोगशालाओं (Labs) को देखने और समझने का मौका मिलता है।
दिग्गज वैज्ञानिकों से सीधा संवाद: इस कार्यक्रम में बच्चों को देश के शीर्ष अंतरिक्ष वैज्ञानिकों और 'गगनयात्रियों' (Gaganyaatris) से सीधे बातचीत करने का अवसर मिलता है। बच्चे वैज्ञानिकों से सवाल पूछते हैं और उनके अनुभवों से प्रेरित होते हैं।
प्रैक्टिकल लर्निंग और हैंड्स-ऑन एक्टिविटीज: दो सप्ताह के इस सत्र में बच्चों को केवल लेक्चर नहीं दिए जाते, बल्कि उनसे लाइव मॉडल रॉकेट असेंबली और लॉन्चिंग कराई जाती है। साथ ही चंद्रयान-3 DIY किट असेंबली, कैनसैट (CANSAT) और रोबोटिक किट जैसे रोमांचक प्रयोग खुद अपने हाथों से करने का अवसर मिलता है।
STEM करियर के लिए प्रोत्साहन: यह कार्यक्रम युवाओं को भविष्य में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) के क्षेत्र में रिसर्च और करियर बनाने के लिए प्रेरित करता है, जिससे देश को आने वाले समय में नए वैज्ञानिक और इंजीनियर मिल सकें।
देशभर के बच्चों के साथ पीयर लर्निंग: देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिभाशाली बच्चे इसमें शामिल होते हैं। इससे बच्चों में टीमवर्क, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और नए विचारों को साझा करने की क्षमता विकसित होती है, जो उनके आत्मविश्वास को बढ़ाती है।
ग्रामीण प्रतिभाओं को विशेष मौका: इसरो इस कार्यक्रम में ग्रामीण और पंचायत क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को चयन प्रक्रिया में विशेष प्राथमिकता देता है, ताकि दूर-दराज के प्रतिभावान बच्चों को भी देश के मुख्य वैज्ञानिक मंच तक पहुंचने का समान अवसर मिले।
भविष्य के 'विकसित भारत' की नींव
इसरो के अनुसार, यह कार्यक्रम पूरी तरह से सरकार द्वारा प्रायोजित (फ्री ऑफ कॉस्ट) होता है। युविका-2026 के उद्घाटन के दौरान इसरो चेयरमैन ने कहा था कि भारत के युवा छात्र ही वर्ष 2047 तक 'विकसित भारत' के सपने को पूरा करने में और 'भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन' व 'गगनयान' जैसे भविष्य के मिशनों में सबसे बड़ी भूमिका निभाएंगे। पचमढ़ी की बेटी जयश्री कासोधन की यह सफलता न केवल उनके विद्यालय बल्कि पूरे प्रदेश के बच्चों के लिए प्रेरणास्रोत है।