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हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: शिक्षाकर्मी की मौत पर आश्रित को देनी होगी अनुकंपा नियुक्ति, जिला पंचायत का आदेश रद्द

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: शिक्षाकर्मी की मौत पर आश्रित को देनी होगी अनुकंपा नियुक्ति, जिला पंचायत का आदेश रद्द

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि केवल शिक्षक पद के लिए आवश्यक योग्यता नहीं होने के आधार पर किसी आश्रित का आवेदन खारिज नहीं किया जा सकता। अदालत ने इसे अनुचित और मनमाना निर्णय मानते हुए संबंधित विभाग को आवेदक की शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप अन्य रिक्त पद पर नियुक्ति पर विचार करने के निर्देश दिए हैं।

शिक्षक के निधन के बाद बेटे ने किया था आवेदन

मामला दुर्ग जिले में पदस्थ सहायक शिक्षक (पंचायत) चमन लाल वर्मा से जुड़ा है, जिनका 15 अक्टूबर 2015 को सेवा के दौरान निधन हो गया था। उनके निधन के बाद पुत्र राकेश कुमार वर्मा ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था। हालांकि जिला पंचायत दुर्ग ने वर्ष 2018 में आवेदन यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि आवेदक के पास शिक्षक पद के लिए निर्धारित डीएड, बीएड और टीईटी जैसी आवश्यक योग्यताएं नहीं हैं।

याचिकाकर्ता ने नीति में बदलाव का दिया हवाला

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि समय-समय पर अनुकंपा नियुक्ति संबंधी नीतियों में बदलाव हुए हैं। पहले योग्य आश्रितों को सहायक शिक्षक पद पर नियुक्त करने का प्रावधान था, जबकि बाद में शिक्षक पद की पात्रता नहीं होने पर ग्राम पंचायत सचिव जैसे पदों पर नियुक्ति की व्यवस्था की गई। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि यदि शिक्षक पद के लिए योग्यता उपलब्ध नहीं थी, तो प्रशासन को उनकी शैक्षणिक पात्रता के अनुरूप किसी अन्य उपयुक्त पद पर नियुक्ति पर विचार करना चाहिए था।

हाईकोर्ट ने आदेश को बताया अनुचित

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की एकलपीठ ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का मूल उद्देश्य मृतक कर्मचारी के परिवार को आर्थिक सहायता और राहत प्रदान करना है। ऐसे में केवल एक विशेष पद की योग्यता नहीं होने के कारण आवेदन को पूरी तरह अस्वीकार करना न्यायोचित नहीं माना जा सकता।

जिला पंचायत का आदेश निरस्त

हाईकोर्ट ने जिला पंचायत दुर्ग द्वारा जारी अस्वीकृति आदेश को रद्द कर दिया है। साथ ही पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा जिला पंचायत को निर्देश दिया गया है कि आवेदक की शैक्षणिक योग्यता का परीक्षण कर उसे किसी स्वीकृत और रिक्त चतुर्थ श्रेणी पद पर नियुक्ति देने की प्रक्रिया शुरू की जाए।

चार माह में पूरी करनी होगी प्रक्रिया

अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि आदेश की प्रति प्राप्त होने के चार महीने के भीतर नियुक्ति संबंधी पूरी प्रक्रिया पूरी की जाए। इस फैसले को अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिससे भविष्य में समान परिस्थितियों वाले अन्य आश्रितों को भी राहत मिल सकती है।


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