कश्मीर के इतिहास में 22 अप्रैल एक ऐसा दिन बन चुका है, जिसे भुला पाना आसान नहीं। पिछले साल इसी दिन पहलगाम की खूबसूरत बैसारन घाटी में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। इस हमले में 26 निर्दोष लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। आज उनकी पहली बरसी पर घाटी में सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं।
पहलगाम हमला: दर्दनाक याद
पिछले साल बैसारन मैदान में आतंकियों ने निहत्थे पर्यटकों और स्थानीय लोगों को निशाना बनाकर अंधाधुंध फायरिंग की थी। इस कायराना हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी, जिसने पूरे देश को शोक में डुबो दिया। आज भी उस घटना की यादें घाटी की फिजाओं में महसूस की जा सकती हैं। लिद्दर नदी के किनारे बना शहीद स्मारक उन बलिदानों की गवाही दे रहा है।
घाटी में हाई अलर्ट और कड़ी सुरक्षा
हमले की पहली बरसी को देखते हुए जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं। LOC से लेकर श्रीनगर तक हाई अलर्ट जारी किया है। बैसारन और आसपास के पहाड़ी इलाकों में सेना की विशेष तैनाती बरती है।
10–15 जवानों की छोटी टुकड़ियों में गश्त
ड्रोन और CCTV से निगरानी, पर्यटन स्थलों पर सघन चेकिंग श्रीनगर के लाल चौक से डल झील तक सुरक्षा का कड़ा घेरा बनाया गया है ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि को तुरंत रोका जा सके।
ऑपरेशन महादेव: आतंकियों का खात्मा
29 जुलाई 2025 को सुरक्षाबलों ने “ऑपरेशन महादेव” के तहत बड़ी सफलता हासिल की। इस ऑपरेशन में पहलगाम हमले के तीनों मुख्य आरोपी आतंकियों को मार गिराया गया। इनमें फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान शाह, हबीब ताहिर, हमजा अफगानी शामिल थे, यह ऑपरेशन भारतीय सेना की रणनीतिक और खुफिया क्षमता का बड़ा उदाहरण बना।
क्लीन स्वीप अभियान: आतंक के खिलाफ जंग
हमले के बाद शुरू हुआ “क्लीन स्वीप” अभियान लगातार जारी है।
मुख्य आंकड़े (पिछले 12 महीने):
46 आतंकवादी ढेर
जम्मू और कश्मीर दोनों क्षेत्रों में कार्रवाई
किश्तवाड़, उधमपुर और कठुआ में नेटवर्क ध्वस्त
प्रमुख ऑपरेशन:
22 फरवरी: किश्तवाड़ में जैश कमांडर सैफुल्लाह मारा गया
23 जनवरी: कठुआ में अबू माविया ढेर
बदली हुई सुरक्षा रणनीति
पहलगाम हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी रणनीति में बड़े बदलाव किए हैं, छोटे-छोटे ऑपरेशनल यूनिट्स का गठन किया है। जंगल और पहाड़ी क्षेत्रों में सक्रिय निगरानी रखी है। टेक्नोलॉजी आधारित सर्विलांस और स्थानीय इंटेलिजेंस नेटवर्क मजबूत रखा है। इन बदलावों का असर अब साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। पहलगाम हमले की पहली बरसी सिर्फ शोक का दिन नहीं, बल्कि संकल्प का भी प्रतीक है। देश उन 26 शहीदों को नमन कर रहा है और सुरक्षा बल यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि ऐसी घटना दोबारा न हो। कश्मीर घाटी आज पहले से ज्यादा सतर्क, मजबूत और सुरक्षित दिखाई दे रही है, जहां आतंक के खिलाफ निर्णायक लड़ाई जारी है।