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गंगरेल बांध के पानी में उतरे 100 प्रभावित, 9 की तबीयत बिगड़ी; 6 साल से पुनर्वास का इंतजार

गंगरेल बांध के पानी में उतरे 100 प्रभावित, 9 की तबीयत बिगड़ी; 6 साल से पुनर्वास का इंतजार

गंगरेल बांध के डुबान क्षेत्र से प्रभावित परिवारों ने पुनर्वास की मांग को लेकर एक बार फिर आंदोलन तेज कर दिया है। अपनी मांगें शासन तक पहुंचाने के लिए करीब 100 प्रभावित लोग बांध के पानी में उतरकर जल सत्याग्रह कर रहे हैं। आंदोलन के तीसरे दिन नौ प्रदर्शनकारियों की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पुनर्वास को लेकर लंबे समय से उनकी मांगें लंबित हैं।

पानी में खड़े होकर जता रहे विरोध, 9 अस्पताल में भर्ती

पुनर्वास की मांग को लेकर प्रभावित परिवार दिनभर बांध के पानी में खड़े रहकर विरोध दर्ज करा रहे हैं। आंदोलन के तीसरे दिन नौ लोगों को थकान, कमजोरी और पैरों में संक्रमण जैसी समस्याएं होने लगीं। इसके बाद सभी को उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।

लगातार पानी में खड़े रहने के कारण प्रदर्शनकारियों की परेशानी बढ़ रही है, लेकिन वे अपनी मांगों पर कार्रवाई होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं।

बांध निर्माण में डूबे थे 52 गांव, हजारों परिवार हुए प्रभावित

गंगरेल बांध के निर्माण के दौरान 52 गांव डुबान क्षेत्र में आ गए थे। इन गांवों में रहने वाले करीब 8,700 परिवारों को मुआवजा देकर विस्थापित किया गया था। हालांकि, प्रभावित परिवारों के एक बड़े हिस्से को पुनर्वास का लाभ नहीं मिल सका।

उस समय प्रदेश में अजीत जोगी मुख्यमंत्री थे। प्रभावित परिवारों को बसाने के उद्देश्य से जोगीडीह नाम से एक गांव बसाया गया था। लेकिन जानकारी के अनुसार, वहां केवल 109 परिवारों को ही बसाया जा सका। बाकी प्रभावित परिवार पुनर्वास की मांग को लेकर संघर्ष करते रहे।

हाईकोर्ट के आदेश के छह साल बाद भी इंतजार

पुनर्वास से वंचित परिवारों ने इस मुद्दे को अदालत में उठाया था। मामला हाईकोर्ट पहुंचने के बाद करीब छह साल पहले अदालत ने सभी प्रभावित परिवारों को समान दर्जा देते हुए एक समान पुनर्वास की व्यवस्था करने का आदेश राज्य सरकार को दिया था।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि आदेश के बावजूद अब तक पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। इसी वजह से प्रभावित परिवारों को बार-बार आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।

आखिर कब पूरी होगी पुनर्वास की मांग?

गंगरेल बांध से प्रभावित परिवारों का आंदोलन एक बार फिर इस सवाल को सामने ला रहा है कि विस्थापन के इतने वर्षों बाद भी सभी परिवारों को पुनर्वास का लाभ क्यों नहीं मिल पाया। जल सत्याग्रह के जरिए प्रदर्शनकारी सरकार का ध्यान अपनी समस्या की ओर खींचना चाहते हैं।

तीसरे दिन नौ लोगों की तबीयत बिगड़ने के बाद आंदोलन को लेकर चिंता बढ़ गई है। अब देखना होगा कि प्रभावित परिवारों की मांग पर शासन की ओर से क्या कदम उठाया जाता है और हाईकोर्ट के आदेश के पालन को लेकर आगे क्या कार्रवाई होती है।


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