नीलेश शर्मा, धार : मध्यप्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला एक बार फिर विवाद और चर्चा के केंद्र में है। वसंत पंचमी के आगमन के साथ ही मंदिर–मस्जिद से जुड़ा यह पुराना मामला तूल पकड़ने लगा है। भोजशाला को हिंदू पक्ष मां वाग्देवी सरस्वती का प्राचीन मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौलाना की मस्जिद के रूप में देखता है। इसी को लेकर धार्मिक अधिकारों और पूजा–नमाज की अनुमति का प्रश्न एक बार फिर अदालतों तक पहुंच गया है।
इतिहास से जुड़ी भोजशाला
भोजशाला का निर्माण परमार वंश के प्रतापी राजा भोज ने 1034 ईस्वी में कराया था। यह स्थल न केवल मां सरस्वती के मंदिर के रूप में, बल्कि संस्कृत शिक्षा, योग और वास्तुकला के केंद्र के रूप में भी जाना जाता रहा है। राजा भोज स्वयं मां सरस्वती के अनन्य उपासक थे और धार को विद्या का प्रमुख केंद्र बनाया था।
इतिहास के अनुसार, 1305 ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के बाद भोजशाला को क्षति पहुंची। बाद में 1401 ईस्वी में दिलावर खान गौरी और 1514 ईस्वी में महमूद शाह खिलजी द्वारा परिसर के हिस्सों में मस्जिदों का निर्माण कराया गया। यहीं से यह विवाद मंदिर और मस्जिद के रूप में उलझता चला गया।
न्यायालय और ASI सर्वे
भोजशाला विवाद हाईकोर्ट तक पहुंचा, जहां याचिका दायर कर सरस्वती देवी की प्रतिमा स्थापना, पूरे परिसर की फोटोग्राफी-वीडियोग्राफी और नमाज पर रोक की मांग की गई। हाईकोर्ट के निर्देश पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने 98 दिनों तक गहन सर्वे किया। सर्वे में करीब 1800 मूर्ति-अवशेष, शिलालेख, संस्कृत-प्राकृत भाषा के श्लोक, विभिन्न लिपियों के अभिलेख और प्राचीन सिक्के मिलने का दावा किया गया। एएसआई रिपोर्ट में भोजशाला के शिल्प और वास्तुकला से जुड़े कई ऐतिहासिक प्रमाण सामने आए हैं।
लंदन में सरस्वती प्रतिमा का मुद्दा
ब्रिटिश शासनकाल में वर्ष 1875 में हुई खुदाई के दौरान मां सरस्वती की एक प्रतिमा मिली थी, जिसे अंग्रेज अधिकारी मेजर किनकेड लंदन ले गए थे। यह प्रतिमा आज भी लंदन के संग्रहालय में बताई जाती है। याचिका में इस प्रतिमा को भारत वापस लाने की मांग भी उठाई गई है।
वसंत पंचमी और बढ़ता तनाव
इतिहास गवाह है कि जब-जब वसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ी है, तब-तब भोजशाला में तनावपूर्ण हालात बने हैं। वर्ष 2006, 2013 और 2016 में भी ऐसे हालात सामने आए थे। इस बार भी वसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ रही है। हिंदू पक्ष ने मांग की है कि वसंत पंचमी के दिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक अखंड पूजा-अर्चना की अनुमति दी जाए और उस दिन जुमे की नमाज पर रोक लगाई जाए। भोज उत्सव समिति और हिंदू संगठनों ने बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं से शामिल होने का आह्वान किया है।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
हिंदू पक्ष की ओर से दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। शीर्ष अदालत 22 जनवरी 2026 को, यानी वसंत पंचमी से एक दिन पहले, इस मामले पर सुनवाई करेगी। यह सुनवाई प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष होगी। फैसले पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं।
अलर्ट मोड पर पुलिस-प्रशासन
संभावित भीड़ और संवेदनशीलता को देखते हुए धार प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। शहर को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। भोजशाला परिसर और आसपास के क्षेत्रों में करीब 8 हजार पुलिस बल, आरएएफ और अन्य सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं।
भोजनशाला नो-फ्लाइंग जोन घोषित
पूरे क्षेत्र में 1000 से अधिक सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है, ड्रोन कैमरों का भी उपयोग होगा। भोजशाला परिसर को नो-फ्लाइंग जोन घोषित किया गया है। शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार फ्लैग मार्च भी निकाले जा रहे हैं। अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई और फैसले पर टिकी हैं, जिससे इस हजार साल पुराने ऐतिहासिक और धार्मिक विवाद की दिशा तय होने की उम्मीद है।