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भोपाल का राजभवन शाही वास्तुकला और प्राकृतिक सौंदर्य का अनूठा संगम, 32 एकड़ में फैली इस धरोधर की जानें खासियत

भोपाल का राजभवन शाही वास्तुकला और प्राकृतिक सौंदर्य का अनूठा संगम, 32 एकड़ में फैली इस धरोधर की जानें खासियत

भोपाल : मध्यप्रदेश का राजभवन देश के खूबसूरत राजभवनों में से एक है। यह राजभवन भोपाल शहर के बीचो-बीच करीब 32 एकड़ में बना हुआ है। जिसका निर्माण 1880 में तत्कालीन शासक नवाब शाहजहां बेगम ने ब्रिटिश अधिकारियों के आवास के रूप में कराया था। यूरोपीय शैली में तैयार इस भवन की छत पर विशेष चाइना टाइलों का उपयोग किया गया था, जो उस दौर की आधुनिक निर्माण तकनीक का उदाहरण माना जाता है।

इस गैलरी में करीब 30 चित्र लगे हुए 

इस राजभवन के बैंक्वेट हॉल का वास्तुशिल्प और झूमर विशेष दर्शनीय है। इसके साथ ही 1796 ई. की ऐतिहासिक तोप भी इस जगहे की खूबसूरती को बढ़ता है। राजभवन का भ्रमण करने आने वाले लोगों के लिए सांदिपनी सभागार भी बनाया गया है. इसमें भारतीय आश्रम शिक्षा पद्धति और पठन-पाठन की सचित्र जानकारी दी गई है। इस गैलरी में करीब 30 चित्र लगे हुए हैं. इतना ही नहीं राजभवन का पंचतंत्र पार्क बच्चों के लिए आकर्षण का केंद्र है. यहां बाघ, हिरण, मोर समेत अन्य पशु-पक्षियों की मूर्तियां लगी हैं. इसके अलावा हॉल में एक छोटा चिड़ियाघर भी बनाया है, यानि यहां आपको घूमने के साथ-साथ मनोरंजन भी मिलेगा। 

मध्य प्रदेश में दो राजभवन स्थित

वर्तमान में यह मध्य प्रदेश के राज्यपाल का आधिकारिक निवास है। परिसर में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के ठहरने के लिए भी विशेष कक्ष उपलब्ध हैं। प्रदेश का दूसरा राजभवन पचमढ़ी में स्थित है, जहां राज्यपाल समय-समय पर प्रवास करते हैं। राजभवन परिसर में विकसित धनवंतरी औषधीय उद्यान और विभिन्न प्रजातियों के गुलाब इसकी प्राकृतिक सुंदरता को और भी आकर्षक बनाते हैं। 

2025 में राजभवन हुआ लोक भवन 

1880 में बना यह खूबसूरत राजभवन पहले लाल कोठी के नाम से मशहूर था। लेकिन 2025 में मध्य प्रदेश सरकार ने राजभवन का नाम बदलकर ' लोक भवन ' कर दिया है। यह बदलाव केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय (MHA) के निर्देश के बाद हुआ है। 
 


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