मुकेश प्रजापति, भेरूंदा : शारदीय नवरात्रि में देवी मंदिरों में भक्तों का सैलाब उमड़ रहा है। इसी आस्था के बीच भेरूंदा विंध्य की पहाड़ियों में स्थित एक ऐसा मंदिर है, जो अपनी अनोखी प्रतिमा और रहस्यमयी शक्ति के लिए जाना जाता है। यह मंदिर मां काली का है, जहां उनकी बीस भुजाओं वाली प्रतिमा पिछले लगभग 900 वर्षों से विराजमान है।
यहां विराजी मां काली
भेरूंदा तहसील के कुरी नयापुरा गांव में स्थित यह प्राचीन मंदिर समुद्र तल से करीब 9 हजार फीट ऊंचाई पर बसा हुआ है। दुर्गम रास्तों से होकर यहां पहुंचना आसान नहीं है, लेकिन फिर भी श्रद्धालुओं की आस्था उन्हें यहां तक खींच लाती है। पहले यहां केवल आदिवासी समाज ही दर्शन करने आते थे, लेकिन अब भक्तों के सहयोग से मंदिर और मार्ग का विकास किया गया है, जिससे बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचने लगे हैं।
20 भुजाओं वाली प्रतिमा
विशेष बात यह है कि मां काली की यह प्रतिमा 20 भुजाओं वाली है, जो इसे और भी अद्वितीय बनाती है। पुरातत्व विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रतिमा करीब 900 साल पुरानी है। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना हमेशा पूरी होती है।
कई कहानियां प्रचलित
मंदिर से जुड़े चमत्कारों की भी कई कहानियां प्रचलित हैं। ग्रामीणों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति मां के मंदिर की 21 परिक्रमा करता है तो उस पर लगी भूत-प्रेत या नकारात्मक शक्तियों की बाधा समाप्त हो जाती है। नवरात्रि के दौरान इस मंदिर में विशेष भीड़ रहती है और दूर-दराज़ से भक्त यहां आकर मां काली के दर्शन कर अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की प्रार्थना करते हैं।