तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। भाजपा के फायरब्रांड नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने पार्टी से इस्तीफा देकर अलग होने का फैसला कर लिया है। मंगलवार को उन्होंने दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व को अपना इस्तीफा सौंप दिया, जिसके बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है।
नितिन नबीन से मुलाकात के बाद सौंपा इस्तीफा
सूत्रों के मुताबिक, अन्नामलाई ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात की और औपचारिक रूप से अपना इस्तीफा सौंप दिया। इसके बाद उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की, जो करीब 30 मिनट से अधिक समय तक चली। इस मुलाकात को उनके राजनीतिक फैसले के बाद बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पार्टी से अलग होने का साफ संकेत
जानकारी के अनुसार, अन्नामलाई ने नेतृत्व को स्पष्ट किया है कि वे अब भाजपा में आगे अपनी भूमिका नहीं देख रहे हैं और पार्टी से अलग होकर नया राजनीतिक रास्ता अपनाना चाहते हैं। इस फैसले के बाद संगठन के भीतर भी चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
मनाने की कोशिशें नाकाम
पार्टी की ओर से उन्हें रोकने और मनाने के प्रयास भी किए गए, साथ ही यह भी चर्चा थी कि उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। हालांकि, मौजूदा घटनाक्रम के बाद उनके इस्तीफे की पुष्टि ने स्थिति बदल दी है।
तमिलनाडु की राजनीति पर असर
अन्नामलाई के इस कदम को भाजपा के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। तमिलनाडु में उनकी मजबूत पकड़ और युवाओं के बीच लोकप्रियता को देखते हुए उनके अलग होने से राज्य की सियासत में नए समीकरण बनने की संभावना है।
IPS से राजनीति तक का सफर
के. अन्नामलाई पूर्व आईपीएस अधिकारी रह चुके हैं और 2020 में भाजपा में शामिल हुए थे। 2021 से 2025 तक उन्होंने तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के रूप में संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पार्टी से अलग होने के बाद वह आगे किस राजनीतिक दिशा में कदम बढ़ाते हैं।