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सैनिकों के बच्चों ने मानवाधिकार आयोग से पूछा, पत्थरबाजों पर रहम और सैनिकों पर सितम क्यों…

By Sanjeet Tripathi

राष्ट्रीय | Published On: 8 Feb, 2018 | 7:08 PM GMT 05:30+

सैनिकों के बच्चों ने मानवाधिकार आयोग से पूछा, पत्थरबाजों पर रहम और सैनिकों पर सितम क्यों…

नई दिल्ली : जम्मू-कश्मीर में पत्थरबाजों के आतंक, सैनिकों पर दर्ज हुई एफआईआर और सैनिकों पर पत्थर बरसाने वालों पर से एफआईआर हटाने की घटनाओं से चिंतित सैनिकों के बच्चे राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) का दरवाजे पर पहुंचे हैं।  इन बच्चों ने मानवाधिकार आयोग से भारतीय सेना के जवानों के मानव अधिकारों के संरक्षण की मांग की है और पूछा है कि राज्य के पत्थरबाजों पर रहम और सैनिकों पर सितम क्यों हो रहा है?

बच्चों का तर्क है कि घाटी में पत्थरबाज दिन-प्रतिदिन सैनिकों के मानव अधिकारों का उल्लंघन कर रहे हैं। एनएचआरसी के अध्यक्ष जस्टिस एच एल दत्तू को पत्र लिखने वालों में प्रीति, काजल और प्रभाव हैं। इनमें से दो बच्चे एक लेफ्टिनेंट कर्नल के हैं और एक रिटायर्ड नायब सूबेदार का बच्चा है।

बच्चों ने अपने आवेदन में कहा है कि जम्मू-कश्मीर का स्थानीय प्रशासन आंख बंद कर स्थानीय लोगों का पक्ष ले रहा है। इसकी वजह से पत्थरबाज न केवल आर्मी पर्सनल्स पर पत्थर बरसाते हैं बल्कि उनकी जान को इनसे हमेशा खतरा बना रहता है। पत्थरबाज अक्सर जान से मारने की धमकी भी देते हैं। मानव अधिकारों पर सर्वोच्च संस्था को लिखे पत्र में बच्चों ने लिखा है कि आजादी के बाद से ही जम्मू-कश्मीर में एक गुप्त युद्ध लड़ा जा रहा है।

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बच्चों का कहना है कि राज्य और केंद्र सरकार ने मिलकर राज्य में फेल प्रशासनिक मशीनरी को दुरुस्त करने के लिए ही आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल पॉवर एक्ट लागू किया था मगर इसका विरोध करते हुए घाटी के लोग सेना के जवानों को ही अपना दुश्मन मानने लगे हैं।

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Title For Web: The children of the soldiers asked the HRC, why mercy on stone boys and tough on soldiers
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