हरिभूमि- आईएनएच का 'कृषि संवाद': उत्पादन आयुक्त परदेसी बोले- गन्ना की सबसे अधिक कीमत छत्तीसगढ़ में

छत्तीसगढ़ के कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेसी का कहना है कि छत्तीसगढ़ में गन्ना किसानों को अभी जितनी कीमत मिल रही है, वह देश में सबसे अधिक है। यही नहीं राज्य में मक्का, का उत्पादन बढ़ाने की कोशिश के तहत कांट्रेक्ट फार्मिंग की भी शुरुआत की जा रही है। एथेनॉल प्लांट भी लेकर आ रहे हैं और मक्का को मंडी शुल्क से मुक्त करने की तैयारी भी है। श्री परदेसी ने यह बात शनिवार को हरिभूमि-आईएनएच के प्रधान संपादक डॉ हिमांशु द्विवेदी के सवालों के जवाब में कृषि संवाद कार्यक्रम में कही। उनसे हुए चर्चा के प्रमुख अंश।

 

छत्तीसगढ़ की नौकरशाही में मुख्य सचिव के बाद सबसे महत्वपूर्ण पद कृषि उत्पादन आयुक्त का माना जाता है। ये पद जितना महत्वपूर्ण है उतना ही चुनौती भरा भी है। किस रूप में देखते हैं ये चुनौती।
छत्तीसगढ़ एक कृषि बाहुल्य क्षेत्र है। यहां की अधिकांश योजनाएं कृषि से ही जुड़ी होती हैं। इसलिए ये काम चुनौती पूर्ण है।

इस काम में परेशान कब होते हैं, जब धान का उत्पादन ज्यादा हो जाए या जब कम हो।
हम चाहते हैं पैदावार बढ़े, किसानों की उत्पादकता बढ़े, फसल का विविधीकरण हो। किसानों को ज्यादा से ज्यादा लाभ मिले।

फसल चक्र परिवर्तन की बात राज्य गठन के समय से चल रही है, 25 साल बाद भी क्या वजह है कि धान से शुरु होकर धान पर खत्म।
छत्तीसगढ़ में गन्ना, दलहन, तिलहन, और कपास की पैदावार भी होती थी, पीएम आशा योजना में दलहन-तिलहन का रकबा बढ़ा है। धान का रकबा एक प्रतिशत कम हुआ है। किसान धान के अलावा अतिरिक्त अन्य फसल भी ले रहे हैं, इस पर काम चल रहा है।

 

इस प्रदेश में शुगर फैक्टरियां खोली गईं, सरगुजा, कवर्धा, पंडरिया में कवर्धा को छोड़कर बाकी सभी फैक्टरियां सांसों के लिए भी जूझ रही हैं क्योंकि उन्हें गन्ना नहीं मिल रहा है। ये कडवाहट क्यों?
ये कड़वाहट नहीं है। मिठास बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री के निर्देश पर गन्ने की कीमत 355 रुपए से बढ़ाकर 425 रुपए की गई है। इसकी वजह से अब गन्ने का रकबा भी बढ़ेगा। राज्य में किसानों को गन्ने की इतनी कीमत दी जा रही है जितनी देश के किसी राज्य में नहीं मिलती है। इसके साथ ही एथेनाल बनाने पर भी काम किया जा रहा है।

हार्टीकल्चर (बागवानी) मुनाफे का सौदा बने, पर इसके किसानों की संख्या सैकड़ो में है, लोग दुखी हैं।
बागवानी में बढोत्तरी के लिए कैबिनेट में निर्णय लिया गया और किसानों को 15 हजार रुपए प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। बागवानी में सब्जी, ड्रैगन फ्रूट नाशपत्ती, कटहल, काजू, पर भी काम कर रहे हैं। लेकिन इसमें प्रोसेसिंग जरुरी है। उसके लिए सहयोग कर रहे हैं। और एक महत्वपूर्ण बात फसल चक्र परिवर्तन एक दिन में नहीं होता है।

किसान अगर धान की फसल लगाए और बागवानी भी करे तो क्या उसे भी बागवानी का बोनस मिलेगा?
खरीफ में धान लगाएं तो बागवानी की राशि नहीं मिलेगी। क्योंकि किसान बागवानी में जाकर भी आत्म निर्भर बन सकता है। उदाहरण के लिए सरगुजा में एक किसान मिर्च की फसल एक एकड़ में लगाकर ढाई लाख रुपए कमा रहा है।

छोटे और सीमांत किसानों को खेती से जुड़ी तकनीकी जानकारी नहीं मिल पाती इसके लिए क्या कर रहे हैं।
किसानों के लिए आज सबसे महत्वपूर्ण तकनीक ही है। इसके लिए हम आगे बढ़ रहे हैं। चाहे वह फसल आधारित हो या कृषि मित्र के माध्यम से भी काम कर रहे हैं, खेत बचाओ कार्यक्रम में किसान को ब्रांड एम्बेसेडर बना रहे है।

टेक्नोलाजी सबके पास है, उसका जरिया है मोबाइल, क्या किसान पूरे समय कृषि विभाग के संपर्क में रह सके इसके लिए कोई काम कर रहे हैं।
किसानों की फार्मर आईडी बनी है। हर किसान उससे जुड़ा है। सूचनाओं का आदान प्रदान हो रहा है। एफएसएस सिस्टम बना रहे हैं। उससे किसान को जानकारी मिलेगी कि कब खाद डालनी है, कब कीटनाशक डालना है। फार्मर आईडी बनाने में छत्तीसगढ़ देश में नंबर एक पर है। 

किसान कर्ज नहीं ले रहे है, ये बात सामने आई है?
हमारे यहां किसान केसीसी के माध्यम से लोन लेते हैं। लोन सोसाइटी से मिलता है।उसमें नकद राशि के साथ आदान सामग्री खाद बीज भी दिया जाता है। इस तरह किसान को ऋण लेने के लिए प्रोत्साहित कर रहे है। केसीसी से खाद वितरण उस समय किया गया जब दुनिया में खाद की कमी थी। छत्तीसगढ़ में डेढ़ लाख मीट्रिक टन खाद की बचत हुई। इसकी जगह नैनो खाद दिया गया। 287 करोड़ की सब्सिडी बचाई है।

नैनो कितना प्रभावी है।
नैनो भी एक टेक्नोलाजी है। उसमें नैनो पार्टिकल रहता है। जिसने इसका उपयोग किया वे नैनों पर आ गए हैं। उनका इससे लगाव हो गया है।

किसानों की आय बढ़ाना सरकार का लक्ष्य है। इसके लिए क्या कर रहे हैं।
इसके लिए सरकार के चार विभाग कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, और मत्स्य पालन मिलकर काम कर रहे हैं। किसान अगर इंटिग्रेटेड फार्मिंग करेंगे तो आय बढ़ेगी।

यह लक्ष्य कैसे पूरा होगा। अगर किसान धान पर प्रति एकड़ 42 हजार रुपए कमाए और बागवानी की ढाई लाख की कमाई छोड़ दे।
बागवानी धान की फसल लगाने से अधिक परिश्रम वाला काम है। इसलिए यह काम पिछड़ा है। हमारे यहां मक्का का उत्पादन भी होता है। हम उद्योगों के साथ बात कर रहे हैं। एथेनाल प्लांट लगाने की ओर बढ़ रहे हैं। इसके साथ ही मक्का की कांट्रेक्ट फार्मिंग भी की जाएगी। मक्का के लिए मंडी शुल्क माफ करने की भी तैयारी है। यह करने से किसानों की आय बढ़ेगी और लक्ष्य पूरा होगा।

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